Wednesday, June 12, 2019

Essay in hindi on दहेज प्रथा | Dowry Culture in india

भारत के सदियों पुरातन धर्म से ही अत्यधिक खर्चीली एवं जटील रिती मानी जाती है दहेज प्रथा ।इसमें भारी सजावट, शानदार बहुमूल्य, उपहार तथा दूल्हे के परिवार को खुश करने के लिए लाखों रुपए दिए जाते हैं,  इसे ही दहेज प्रथा कहा जाता है, इस प्रकार की प्रथा वर्षों से चली आ रही है,  पहले माता-पिता अपनी पुत्रियों की शादी में आवश्यक घरेलू वस्तुएं तथा सोना चांदी देते थे,  जो उनकी पुत्रियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए होता था, अब दूल्हे का परिवार दुल्हन के परिवार से जबरत बहुमूल्य वस्तुएं तथा लाखों रुपए की मांग करते हैं,  कभी-कभी दुल्हन के परिवार को इसके लिए अपना घर एवं जमीन तक बेचना पड़ जाता है, दहेज प्रथा हमारे समाज के लिए एक मिसाल हो गई है,  हमने कई बार सुना है कि दुल्हन अपने ससुराल में प्रताड़ित की जाती है, इसका कारण है दहेज। दूल्हे के परिवार को उसकी मांग के अनुसार रकम ना मिलने की स्थिति में वे दुल्हन को प्रताड़ित करते हैं, यह प्रथा सदियों से चली आ रही है!

 इस प्रथा को तुरंत रोकने की आवश्यकता है, अभिभावकों को समझना चाहिए कि दहेज के लिए धन बचाने के बजाय उन्हें अपनी लड़कियों को शिक्षित एवं काबिल बनाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि हमारा देश और भी आगे बढ़े, दहेज मांगना या दहेज देना दोनों ही भारत में गैरकानूनी एवं दंडनीय अपराध है, ऐसे मामले के विरुद्ध तुरंत पुलिस से शिकायत करनी चाहिए, दहेज प्रथा समाप्त करने की हमारी जिम्मेदारी बनती है, एवं अपने माता-पिता अभिभावकों पर दहेज ना लेने के लिए दबाव भी बनाना चाहिए, दहेज मुक्त शादी आपसी परिवार एवं सुखद जीवन के लिए अति आवश्यक है , आज हमारे समाज में दिनो दिन दहेज का प्रचलन बढ़ता जा रहा है, जो लोग गरीब परिवार से हैं उनकी बेटी को पीड़ित किया जाता है,  ससुराल वाले लोग ने ना जाने कितने मासूम लड़कीयो को जिंदा जला दिया, हर जगह गांव में यह सुनने को मिलता है कि विवाहित की हत्या कर दिया गया,  किसी के माता-पिता के पास पैसे नहीं है इसलिए उनकी लड़कियां अच्छे घर परिवार में नहीं जाती है उनको समाज का एक बोझ माना जाता है, इसको रोकने के लिए सभी को साथ मिलकर दहेज प्रथा पर आवाज उठानी चाहिए तथा इस को रोका जा सकता है,  इसके लिए लड़की को अच्छी शिक्षा देना चाहिए ताकि बेटी समाज के कानून को समझ सके, ऐसा विश्वास है कि यह प्रथा एक दिन जरूर समाप्त हो सकती है, इसके लिए सभी अभिभावकों को कदम आगे बढ़ाना पड़ेगा, दहेज प्रथा एक कानूनन अपराध है इसको रोकना बहुत जरूरी है, दहेज मांगना और देना दोनों ही अपराध है, ऐसे मामले के सकारात्मक विरोध करनी चाहिए, हमारे समाज के हर युवाओं को दहेज समाप्त करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए ।