Thursday, January 10, 2019

Essay in hindi on इंटरनेट | Internet पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

                         

 इंटरनेट आधुनिक विज्ञान का एक आश्चर्यजनक उपयोगी अविष्कार है I इंटरनेट का अर्थ होता है अंतरजाल , जिस पर यह बिल्कुल खरा उतरता है I यह सारे संसार के लोगों के बीच तालमेल बैठाकर एक दूसरे को परिचित कराने का काम किया है ,इंटरनेट के माध्यम से हम वह हर काम कर सकते हैं जो उपयोगी एवं अनिवार्य होI  इंटरनेट का असर किसी भी क्षेत्र से अब अछूता नहीं है ,चाहे वह  व्यापार, उद्योग, शिक्षण, सरकारी, गैर- सरकारी दस्तावेजों का अवलोकन  कागजी लेखा-जोखा या  किसी के साथ बातचीत करना होI   वीडियो के माध्यम से हम एक दूसरे को क्रियाशील माध्यम में नजर रखना इत्यादि सभी चीजें अब इंटरनेट के माध्यम से संभव है I इंटरनेट नेटवर्किंग का सूचना का वेब है ,जो कंप्यूटर डिवाइस को विश्व स्तर पर एक साथ जोड़ता है , यह एक ऐसा नेटवर्क है जिससे किसी भी कंप्यूटर डिवाइसेज इसके माध्यम से अन्य कंप्यूटर डिवाइसेज से संपर्क करते हैंI  अर्थात यह परस्पर  जुड़े हुए कंप्यूटर नेटवर्क की वैश्विक प्रणाली है ,जिसके माध्यम से सूचना का आदान- प्रदान किया जाता हैI 

Essay in hindi on सरस्वती पूजा | Saraswati puja पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

                       
 सरस्वती पूजा माघ महीने में शुक्ल पक्ष के वसंतपंचमी के दिन मनाई जाती है, सरस्वती मां को विद्या एवं बुद्धि की परम देवी माना गया है, माता सरस्वती के कृपा से मानव एवं जीव -जंतुओं को वाणी प्राप्त हुआIसरस्वती पूजा विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय हैIस्कूलों,कॉलेजों तथा हर शिक्षण संस्थानों में हर वैसी जगह जहां गीत- संगीत,नृत्य आदि जैसे कला का गुर सिखाया जाता है, बड़े ही धूम-धाम से यह उत्सव  मनाया जाता हैIमां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना जाता है, उनका सवारी हंस है,उनका आसन कमल जो सादगी और स्वच्छता का प्रतीक है I मां सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं  जो की सादगी का प्रतीक है, जिससे यह शिक्षा मिलती है कि विद्या ग्रहण करने वालों को आकर्षक एवं कीमती वस्तुओं का धारण नहीं करना चाहिए ,मां सरस्वती की चार भुजाएं हैं उनकी एक हाथ में वीणा जो संगीत का ज्ञान आवश्यक माना गया है ,गीत एवं संगीत को भक्ति एवं आध्यात्मिक रूप से काफी अहम माना गया है ,दूसरे हाथ में पुस्तक जो ज्ञान का शिक्षा देती है और एक हाथ वरमुद्रा  में और एक हाथ पुष्पमाला से सुसज्जित  हैI  पुराण  एवं शास्त्र के अनुसार वसंत पंचमी अर्थात सरस्वती पूजा के अलग-अलग ढंग से  चित्रण और सुनने को मिलता हैI मां सरस्वती का इसी दिन जन्म हुआ था इसलिए उनके जन्म दिवस के रूप में भी भी यह पर्व मानाया जाता हैI  मां सरस्वती को भगवती शारदा,वीणा- पानी, वागेश्वरी और वाग्देवी के नामों से भी जाना जाता है, सरस्वती पूजा के तैयारियां कुछ दिन पहले से ही  शुरू हो जाती है पूरे उत्साह एवं उमंग के साथ मोहल्ले ,कस्बों तथा गाँवों   में चंदा जमा करते हैं और पूजा के अवसर पर मां सरस्वती के सुंदर मूर्तियां सजावट व सुंदर वस्त्रों से सजा कर उनकी आराधना करते हैंI इस दिन स्त्रियां पीले रंग का वस्त्र धारण करती हैं