Monday, January 7, 2019

Essay on कुंभ मेला Kumbh mela in hindi पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

कुंभ हिंदुओं का पवित्र एवं अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, कुंभ का आयोजन 12 वर्ष के समयांतराल  बाद होता है और इनके मध्यांतर में अर्धकुंभ भी लगता है जो 6 वर्ष के बाद आता है जब सूर्य और चंद्रमा वृश्चिक राशि में  बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करता है ,तब कुंभ मेला का संयोग बनता है। कुंभ पर्व का आयोजन हरिद्वार के गंगा नदी पर प्रयाग के संगम तट पर जहां गंगा ,यमुना एवं सरस्वती का मिलन है, नासिक में गोदावरी नदी और उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे आयोजन होता है I कुंभ मेला विश्व के किसी भी सामूहिक व धार्मिक मेला से जनसंख्या एवं वर्चस्व के मामले में सर्वश्रेष्ठ है, शास्त्रों के अनुसार उस दिन कुंभ पर्व पर श्रद्धालु दान, स्नान, पूजा- अर्चना साधु- संतों का दर्शन करते हैं, ऐसा माना जाता है कि  कुंभ के अवसर पर स्नान करना एक लाख वर्ष पृथ्वी के परिक्रमा के तुल्य के बराबर एवं सैकड़ों यज्ञ के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है ,विद्वानों के अनुसार उस दिन का शाही स्नान दुर्गुणों को दूर कर सद्गुण विचारों का आगमन होता है I इस दिन दान देने से मोक्ष की प्राप्ति होती है एवं मरणोपरांत स्वर्ग लोक में स्थान मिलती है, स्वर्गलोक एक ऐसी जगह है जो हमारे मरने के बाद किए गए नैतिक एवं उचित कार्य व कर्मों के अनुसार प्राप्त होता है, जहां सुख- समृद्धि के साथ- साथ वैभव एवं आनंद का साधन होता है ,वहीं नरक के बारे में कहा जाता है कि  हमारे द्वारा किए गए अनुचित एवं अनैतिक कर्मों का सजा दिया जाता है, जहां यातना एवं कठोर दंड दिया जाता हैI