Friday, September 20, 2019

Essay in Hindi on नया साल | New Year

नया साल नई उम्मीदें, नए सपने, नए लक्ष्य और नए रास्ते पर चलने की उम्मीद है देता है| इसलिए सभी लोग खुशी से नए साल को त्यौहार के रूप में मनाते हैं, लोग यह मानते हैं कि साल का पहला दिन अगर उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाए तो पूरा साल इसी तरह उत्साह और खुशियों के साथ ही बीतेगा |

वैसे तो पूरी दुनिया में नया साल अलग-अलग दिन मनाया जाता है, और भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में भी नए साल की शुरुआत अलग-अलग समय होती है| लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी से नए साल की शुरुआत मानी जाती है, क्योंकि अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से 31 दिसंबर को 1 वर्ष का अंत होने के बाद 1 जनवरी से नए कैलेंडर वर्ष की शुरुआत होती है, इसलिए इस दिन को पूरी दुनिया में नया साल शुरू होने के उपलक्ष्य में पर्व की तरह मनाया जाता है|

Friday, September 6, 2019

Essay in hindi on चंद्रशेखर आजाद | Freedom Fighter chandra shekhar azad

लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी श एवं भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 में मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ । उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी और माता का नाम जगदानी देवी था। उनके पिता स्वाभिमानी सांसी इमानदार और वचन के पक्के थे। यही गुड चंद्रशेखर आजाद जी को अपने पिता से विरासत में मिले थे।

17 वर्ष की आयु में चंद्रशेखर आजाद बनारस गए और वहां एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई किये। वहां पर उन्होंने कानून भंग आंदोलन में अपना योगदान दिया था। 1920-21 के वर्षों में वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जहां उन्होंने अपना नाम 'आजाद'  पिता का नाम स्वतंत्रता और जेल को अपना घर बताया। इस बात के लिए जज ने उन्हें 15 कोणों की सजा सुनाई। हर कोड़े के बाद से उन्होंने 'वंदे मातरम' और महात्मा गांधी की जय का स्वर बुलंद किया

इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से चंद्रशेखर आजाद कहलाने लगे। क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जन्मस्थान भाबरा अब अब आजादनगर के नाम से जाना जाता है।

जब क्रांतिकारी आंदोलन उग्र हुआ तब चंद्रशेखर आजाद उस तरफ खींचे चले गए और 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट आर्मी' से जुड़े।  रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में चंद्रशेखर आजाद ने काकोरी षड्यंत्र (1925) में सक्रिय भाग लिया और पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर फरार भी हो गए।

17 दिसंबर 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय में लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेर लिया और ज्यो ही जे.पी. साण्डर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटरसाइकिल पर बैठकर निकले तो राजगुरु ने पहली गोली दाग दी, जो साण्डर्स के माथे पर लग गई वह मोटरसाइकिल से नीचे गिर पड़ा। फिर भगत सिंह ने आगे बढ़कर चार छह गोली दाग कर उसे मार दिया।  जब साण्डर्स के अंगरक्षको ने उनका पीछा किया तो चंद्रशेखर आजाद ने अपनी गोली से उनका भी खेल खत्म कर दिया।

इतना ही नहीं लाहौर में जगह-जगह पर्ची चिपका दिया उन्होंने जिस पर लिखा था लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला ले लिया गया है। उनके इस कदम को समस्त भारत के क्रांतिकारियों मे खूब सराहा गया।

अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में 1931 मे उन्होंने रूस की बोल्शेविक क्रांति की तर्ज पर समाजवादी क्रांति का आह्वान किया। और उन्होंने संकल्प लिया कि वे ना कभी पकड़े जाएंगे और ना ही ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी।

इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को इसी पार्क में स्वयं को गोली मारकर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी।

इस दिन चंद्रशेखर आजाद के रूप में देश का एक महान क्रांतिकारी योद्धा देश के आजादी के लिए अपना बलिदान दे गया, शहीद हो गया। उनको श्रद्धांजलि देते हुए कुछ महान व्यक्तित्व के कथन निम्न हैं-

चंद्रशेखर की मृत्यु से मैं आहत हूं। ऐसे व्यक्ति युग में एक बार ही जन्म लेते हैं। फिर भी हमें अहिंसक रूप से ही विरोध करना चाहिए।-
महात्मा गांधी

चंद्रशेखर आजाद की शहादत से पूरे देश में आजादी के आंदोलन का नए रूप में शंखनाद होगा। आजाद की शहादत को हिंदुस्तान हमेशा याद रखेगा।-
पंडित जवाहरलाल नेहरू

देश ने एक सच्चा सिपाही खोया।-
मोहम्मद अली जिन्ना

पंडितजी की मृत्यु मेरी निजी छती है। मैं इससे कभी उबर नहीं सकता।-
 महामना मदन मोहन मालवीय

किसी कवि की भावपूर्ण श्रद्धांजलि उस महान क्रांतिकारी के लिए-

जो सीने पर गोली खाने को आगे बढ़ जाते थे,

भारत माता की जय कह कर फांसी पर जाते थे,

जिन बेटो ने धरती माता पर कुर्बानी दे डाली,

 आजादी के हवन कुंड के लिए जवानी दे डाली,

 उनका नाम जुबा पर लो तो पलको को झुका लेना,

 उनको जब भी याद करो तो दो आंसू टपका लेना।