Thursday, August 15, 2019

Essay in hindi on बाल दिवस | Childrens day पर निबंध in Hindi

जन्म दिवस मनाना हमारे भारत की एक प्राचीन परम्परा है। हम अपने महापुरुषों के जन्म दिनों को मनाकर उन्हें अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं और अपने व्यवहारिक जीवन में उनके आदर्शों पर चलने की कोशिश करते हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरु जी भी उन महापुरुषों में से एक हैं जिनका जीवन भावी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत है। पंडित जवाहर लाल नेहरु जी का जन्म 14 नवम्बर, 1889 को इलाहबाद में हुआ था।इसे नेहरू जयंती कहें या फिर बाल दिवस, यह दिन पूर्णत: बच्चों के लिए समर्पित है। इस दिन विशेष रूप से बच्चों के लिए कार्यक्रम एवं खेल-कूद से जूड़े आयोजन होते हैं। बच्चे देश का भविष्य हैं, वे ऐसे बीज के समान हैं जिन्हें दिया गया पोषण उनके विकास और गुणवत्ता निर्धारित करेगा। यही कारण है कि इस दिन बच्चों से जुड़े विभिन्न मुद्दों जैसे शिक्षा, संस्कार, उनकी सेहत, मानसिक और शारीरिक विकास हेतु जरूरी विषयों पर विचार विमर्श किया जाता है। कई स्कूलों व संस्थानों में बाल मेला एवं प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं, ताकि बच्चों की क्षमता और प्रतिभा को और बढ़ावा मिले। इस दिन विशेष रूप से गरीब बच्चों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने एवं बाल श्रृम एवं बाल शोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया जाता है।कई स्कूलों व संस्थानों में बाल मेला एवं प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं, ताकि बच्चों की क्षमता और प्रतिभा को और बढ़ावा मिले। इस दिन विशेष रूप से गरीब बच्चों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने एवं बाल श्रृम एवं बाल शोषण जैसे गंभीर मुद्दों पर भी विचार विमर्श किया जाता है।

सभी विद्यालयों के छात्र कई दिनों पूर्व से बाल दिवस की प्रतीक्षा करते हैं। इस दिन राष्ट्रिय स्तर पर राजकीय अवकाश घोषित नहीं होता लेकिन विद्यालयों में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। 14 नवम्बर को सभी छात्र विद्यालय में उपस्थित होते हैं। इस दिन बच्चे बहुत ही खुश और उत्साहित होते हैं।वे सज-धज कर अपने विद्यालय जाते हैं। दिन भर विभिन्न कार्यक्रम चलते हैं। बच्चे बहुत से विशेष कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। यह दिन बच्चों के लिए बहुत ही हर्ष का दिन होता है। सबसे पहले विभिन्न प्रकार के खेल-कूदों का आयोजन किया जाता है जिसमें विभिन्न छात्रों की रूचि के अनुकूल प्रतियोगिताएं होती हैं।बाल दिवस हमें प्रगति के रास्ते पर आगे बढने का संदेश देता है। बच्चों की प्रगति पर ही देश की प्रगति निर्भर करती है इसलिए हर छात्र को बाल दिवस के दिन प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि वे अपनी बुरी आदतों को त्याग कर अपने जीवन को उज्ज्वल बनाने के लिए मेहनत करेंगे।इस अवसर पर हम सभी को नेहरु जी के जीवन से प्रेरणा लेकर नेहरु जी की तरह देश की सेवा और रक्षा के लिए अपने सारे भेद-भाव भुलाकर, मिलजुल कर देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देना चाहिए। बच्चों के रहन-सहन के स्तर को ऊँचा करने की हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इन्हें स्वस्थ, निर्भीक और योग्य नागरिक बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए।इसके साथ ही बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है।  बच्चों को सही शिक्षा, पोषण, संस्कार मिले य‍ह देशहित के लिए बेहद अहम है, क्योंकि आज के बच्चे ही कल का भविष्य है।

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