Sunday, April 21, 2019

Essay in hindi on रविवार | Sunday holiday पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

 रविवार हर सप्ताह विद्यार्थियों के लिए या सरकारी ,निजी सभी क्षेत्रों में कार्य करने वाले नौकरी पेशा लोगों के लिए  हों या घर में प्रतिदिन गृहणियों  के लिए जो घरेलू कामकाज में हमेशा व्यस्त रहती हैं I  उन सभी के लिए हर सप्ताह रविवार की  छुट्टी का शुभ संदेश  और खुशियां लेकर आता है और फिर चला जाता हैI  इस दिन लोग अपने रोजमर्रा जिंदगी से छुट्टी पाते  हैं चाहे विद्यार्थी हो या दफ्तरों में काम करने वाले सरकारी बाबू  चाहे भोजन पकाते पकाते और घरेलू कामकाज देखते -देखते घर में  ही प्रतिदिन  बिताने  वाली गृहणियां , उस दिन रविवार एक खुशियां की तरह है लोग उस दिन प्रतिदिन वाले कामकाज को छोड़कर कुछ अलग और नया करते हैं जिससे उनकी नीरसता कम हो जाती हैI  हम स्कूल में पढ़ते हो या कॉलेज में ऑफिस में काम करते हो या कल -कारखानों में सभी लोग रविवार की इंतजार बेसब्री से करते हैं क्योंकि इस दिन काम करने वालों को एक  दिन  की छुट्टी मिलती  है जिसमें वह अपने घर से कहीं और पार्क में खेल मैदान में और जो दूर रहते हैं उन्हें अपने परिवार के साथ घर में समय बिताने का मौका मिलता है I 
यह  अवकाश की पक्षी की तरह लोगों को आजाद करती  है जिस प्रकार चिड़िया पिंजरे में रहकर खुश नहीं होता उसी प्रकार हम प्रतिदिन काम करते करते एक ही काम को करने से वह काम रुचि पैदा नहीं करताI रविवार के दिन  हम अपने आप में तनाव से  हल्कापन और बंधनहीनता का अनुभव करते हैंI छः दिनों तक लगातार काम करते करते तन और मन दोनों ही थक जाते हैं इसलिए यह थकान दूर करने के लिए रविवार की छुट्टी नए जीवन में एक भरपूर ताजगी और ऊर्जा लेकर आती हैI  हमें याद है कि हम जब स्कूल में पढ़ते थे उस समय हमारे स्कूल के होमवर्क  करने में हीं सारा समय बित जाता था और खेलने के लिए सारा समय  मात्र एक रविवार  को ही था जिसमें हम लोग जी भर कर मनचाहा तरीके से अपने मनपसंद खेल खेलते थे I उस दिन सभी बच्चे सुबह- सुबह उठकर नाश्ता कर खेल मैदान में पहुंच जाते थे और क्रिकेट, फुटबॉल जैसे खेलों का हमेशा लुफ्त उठाते थेI  इसलिए  रविवार का दिन हमारे लिए एक उपहार से कम नहीं था आज भी स्कूली बच्चों में उसी प्रकार का उत्साह और उमंग देखने को मिलता है ,जब भी उनके स्कूल की छुट्टियां रहती है तो मानो फुले नहीं समाते क्योंकि पढ़ाई लिखाई के बोझ से थोड़ा  हल्का महसूस करते हैं  I आजाद पंछी की तरह  उन्हें मनचाहा काम करने दिया जाता है लोग पेंटिंग ,खेल गायकी इस  प्रकार की कला में अपना समय व्यतीत करते हैंI   अपने परिवार के साथ  कहीं दूसरी जगह घूमने भी  जाते हैंI  रविवार को हम अपने आप में ही एक विचित्र प्रकार के आनंद और खुशी का अनुभव करते हैं ऐसा लगता है मानो वर्षों का बंदी जीवन बिताने के बाद जिस प्रकार एक कैदी जेल से बाहर आकर नए जीवन के आनंद की अनुभूति से भर उठता है और अपने को हर तरह आजाद पाता है, उसी तरह रविवार के दिन हम सभी विशेष प्रकार की खुशियों से भर जाते हैं I 

ऊर्जावान के साथ-साथ हमारे दिमाग को कुछ नए सुझाव और अधिक क्रियाशील बनाने का भी कार्य करता है ,पंचांग के अनुसार  भी यह दिन शुभ माना जाता है प्राय: इसी दिन अनेक प्रकार के अधिकतर धार्मिक कार्यक्रम होते हैं I रविवार की शुरुआत 1843 में में अंग्रेजो के द्वारा सबसे पहले इस आदेश को पारित किया गया था ब्रिटेन में सबसे पहले स्कूली बच्चों को रविवार की छुट्टी देने का प्रस्ताव दिया गया था जिसके पीछे उनका मकसद था बच्चे को और ऊर्जावान  और क्रिएटिव काम के प्रति अधिक रुचि बनानाI  उसके बाद यह पूरे विश्व में फैल गई और भारत में सर्वप्रथम रविवार की छुट्टी मजदूरों को नहीं  दिया गया था जिसके कारण उन्हें अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध संघर्ष करना पड़ा तब जाकर सात साल के बाद  यह छुट्टी  हर वर्गों के लिए लागू हुआI अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संस्था ISO ने रविवार का दिन सप्ताह  का आखिरी दिन  पूरे विश्व में हर कामकाज करने वाले लोगों के लिए कॉमन छुट्टी का प्रस्ताव दिया और 1986 में इसकी मान्यता दी गईI तब से रविवार आज तक सभी के लिए छुट्टी का दिन है I कहा जाता है कि दुनिया में इस दिन छुट्टी की शुरुआत इसलिए भी हुई क्योंकि ये ईसाइयों के लिए गिरजाघर जाकर प्रार्थना करने का दिन होता है I रविवार हर धर्म के लिए महत्वपूर्ण है हर धर्म में कुछ न कुछ धार्मिक कार्य रविवार को संपन्न होता है I 

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