Wednesday, April 10, 2019

Essay in hindi on गंगा नदी | River Ganga पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

गंगा नदी पूरे विश्व के सबसे पवित्र और अध्यात्मिक नदियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है I जिसे भारत में देवी देवताओं के रूप में पूज्नीय माना जाता है उन्हें देवी और माता का भी संज्ञा दिया गया हैI  गंगा नदी में स्नान करना पूरे विश्व में पवित्र आध्यात्मिकता के रूप में प्रचलित हैI   गंगा नदी अपने  अपने भव्यता इतिहास के गौरव में अनोखा नाम अंकित किया हैI गंगा नदी भारत के सबसे बड़ा नदी भी है जो हिमालय पर्वत से निकलकर लगभग 200 मील की दूरी पर से  पहाड़ी क्षेत्रों से बहती हुई हरिद्वार में आकर भूमिगत होकर गिरती हैI  इसलिए हरिद्वार को भी पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक  हिंदुओं के लिए माना गया है जहां हजारों, लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन गंगा में डुबकी लगाने दूर-दराज देश- विदेश से आते हैं और अपने गलती और अनजाने में हुई कोई भूल या चुक  जो अनैतिक कार्य के रूप में हो उसके लिए क्षमा प्रार्थना करते हैं I कहा जाता है इस पवित्र नदी में डुबकी लगाने मात्र सारे पाप धूल जाते हैं I गंगा नदी के किनारे बसे प्रमुख  शहरें जो कि तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है   वाराणसी ,प्रयागराज ,सिरोन इत्यादि हैं I  जहां से गंगा नदी गुजरती है वहां पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल   के रूप में पूरे विश्व में प्रचलित हो जाता है I  

  गंगा अपने जल  के लिए भी काफी प्रसिद्ध है पूरे विश्व में सबसे अधिक मीठा  जल  इसी नदी  का होता है I स्वच्छ और अविरल गंगा हमारे देश के शान में चार चांद लगाती है इनके अध्यात्मिक और बहुत सारे पौराणिक कथाएं हैं  जिनमें गंगा का हमेशा  जिक्र किया गया हैI  मनुष्य के  अलावे स्वयं देवी -देवताओं और ऋषि -मुनियों  भी  प्राचीन समय से  इस नदी को पूजा  करते आए हैंI  गंगा में स्नान मात्र से हीं मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती हैI  स्वच्छ और अविरल गंगा के समीप  हमेशा सुबह-शाम वहां पर गंगा आरती और स्नान के बाद पूजा किया जाता है इसलिए हमेशा गंगा नदी के किनारे लोगों की भारी तादाद में भीड़ जमा रहती है जिनमें स्थानीय शहरवासी बल्कि देश- विदेश से आए पर्यटकों और सैलानियों भी इस तरह के आध्यात्मिक व आस्था के माहौल का भरपूर लुफ्त उठाते हैंI  गंगा आरती वाराणसी का विश्व में सुप्रसिद्ध है जहां राजनीति से लेकर भारत के और विश्व के तमाम प्रसिद्ध हस्तियां शिरकत करती हैI 

 मैंने कभी भी इस नदी को सुनसान नहीं पाया है हमेशा लोगों को नहाते और नदी के किनारे पूजा आराधना करते देखने को मिलता है, कुछ लोग  धर्म का पवित्र ग्रंथ का पाठ कर रहे होते हैं तो कुछ लोग अगल -बगल में शिविर लगाकर वहां के जरूरतमंदों के लिए भोजन अस्त्र चिकित्सा आदि का प्रबंध करते हैं I माना जाता है कि गंगा स्नान करने से लोगों में सद्बुद्धि और मानवीय  कार्य के प्रति सक्रिय रहने में बढ़ावा मिलती हैI  भारत के सबसे बड़ा और सबसे अधिक कृषि के लिए  काम के लिए आने वाला  नदियों  में से एक है जो हमारे किसानों। अन्नदाताओं को सूखे से बचाने का कार्य करती है I गंगा एक प्रभावशाली इतिहास के साथ -साथ स्वच्छ जल से सभी लोगों के दिल में खास जगह  सभी धर्मों के लिए किसी न किसी माध्यम से उनके व्यवसाय और रोजमर्रा जिंदगी के  कामकाज में  सहायता करती है इसीलिए गंगा लोगों के लिए नदी  ही नहीं बल्कि एक परिवार की सदस्य के रूप में आस्था और प्रेम का प्रतीक हैI 

 कर्मकांड से जुड़े होने के कारण कुछ पर बड़े पैमाने पर गंगा नदी को छवियाँ और  उसके दल को दूषित करने में भी आस्था का अहम योगदान है I जैसे कि हिंदू धर्म के अनुसार किसी मरे हुए व्यक्ति के शव  को गंगा नदी के घाट पर दाह संस्कार करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है इसलिए अधिकतर  लोग श्मशान घाट गंगा नदी के किनारे ही है जहां मृत्यु के बाद उन्हें जलाकर और उनके अस्थियों के अवशेष को बहाया जाता हैI  उसके साथ- साथ बची हुई वस्तुएं जैसे जली  हुई लकड़ी , फटे -पुराने कपड़े आदि फालतू समान इसी नदी में प्रवाह  कर दी जाती है I कुछ  अधजले  शवों  को  भी प्रवाह कर  दिया जाता है जिससे सभी जगह विषाणु  फैलने का आशंका ज्यादा बढ़ चुका हैI   इस तरह के बढ़ती जनसंख्या और कर्मकांड की वजह से नदियाँ  के पानी खासकर गंगा नदी  का पानी ज्यादा दूषित हो रही है इसे स्पष्टतः यह जाहिर  तो होता है कि हम अपने मोक्ष की प्राप्ति  के लिए और वैदिक नियमानुसार दाह संस्कार पूजा विधि तो करते हैं पर गंगा नदी का पानी को पवित्र रखने और स्वच्छ पानी को हमेशा बरकरार रखना ताकि जंतुओं और पशुओं के साथ-साथ कृषि के काम में हमेशा सक्रिय रहे भी हमारा  हीं कर्तव्य हैI   अक्सर गाद कचरा देखने को मिलती है गंगा नदी में जो इस पवित्र नदी के स्वच्छ पानी को अपवित्र करने में कोई कसर नहीं छोड़ती अगर हम अपनी आदत  में बदलाव लाएं और सही मायने में गंगा को एक देवी देवताओं का दर्जा देते हैं तो यह हमारा कर्तव्य है  उसके अस्तित्व और स्वच्छता को कभी  धूमिल ना होने दें और लोगों को उसके भौगौलिक  और आध्यात्मिक के सही मायनों में अर्थ समझाएं  क्योंकि मनुष्य के जन्म से लेकर जीवन के अंत तक गंगा जैसी नदियों  पर ही जीवनयापन करने के लिए निर्भर रहना पड़ता हैI  

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