Monday, March 25, 2019

Essay in hindi on खुशहाल जीवन जीने का तरीका | Way to Lead a Happy Life

प्रत्येक कोई हमेशा खुश रहना चाहता है ,लोगो का हमेशा लक्ष्य होता है कि किसी भी तरीके से उस कार्य को करें  जिससे हमें आनन्द  की प्राप्ति हो I  हमें खुशहाल रखने की कार्य सर्वाधिक रूप से विज्ञान और वैज्ञानिकों ने किया है  जो हर तरीके के मनोरंजन से लेकर तकीनीकी यंत्रो तक आविष्कार करके रोजगार के अवसर के साथ -साथ व्यस्तता जिंदगी बना दिया,  जिससे लोगों  के समाजिक व्यवहार और नैतिक चीजों की सूझ-बुझ  होI सामान्यत:आनन्द और खुशियों को लेकर लोग हमेशा संदेह में रहते हैं दोनों का अर्थ अलग- अलग है क्योंकि हमें खुशियों के द्वारा आनंद की प्राप्ति होती हैI  जब भी कोई ऐसा कार्य जिससे करने में हमें किसी प्रकार की हिचकिचाहट नहीं बल्कि दिलचस्पी पैदा होता है और उसके बेहतर तरीके से करना चाहते है जिसे अन्य  लोगों के द्वारा भी समर्थन और प्रोत्साहन  मिलता है उसे ही  आनन्द समझा जाता है जबकि  खुशियां हमारे दिमाग का मनोवृति है जो आत्मविश्वास दिलाता है हमारे मनोवृति ही हमारी खुशियां को निर्धारित करती है इस प्रकार से हम समझ सकते हैं की आनन्द यानी प्रसन्नता इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त होता है जबकि  खुशी स्वयं से ही मन के   भीतर पाया जाता है 

   कुछ लोग समझते हैं कि खुशियां धनी होने से व भौतिक चीजों के उपलब्धता के  कारण आती है लोगों की धारणा है की  जब भी किसी चीज की जरूरत हो हम पैसों से अपने भौतिक चीजों को और सुविधाओं को खरीद कर खुशियां ला सकते हैंI  सभी लोग ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहते जिसमें उन्हें भारी रकम का भुगतान ना हो वह समझते हैं जिनके पास पैसा है उनकी जिंदगी सर्व -संपन्न खुशियों से लिप्त है I जबकि मुझसे पूछा जाए  तो ये सोच गलत है क्यूंकि  मैंने अनेक प्रकार के मनुष्य और दोस्तों ,सगे -संबंधि और लोगों को देखा है कि उनके पास समृद्धि के सारी भौतिक चीजें होते हुए भी  बावजूद खुद से अपने आप को निराश व्यक्ति बताते हैं जिस से यह जाहिर तो होता है की धन-दौलत का खुशियों से कोई मतलब नहीं है I  बहुत सारे लोग  ऐसे भी हैं जो धन और ऐश्वर्य को निंदा करते हैं और समझते हैं कि संपत्ति खुशियों के रास्ते में एक बाधा की तरह है, रोजमर्रा की जिंदगी में जो कार्य और नौकरी  उन्हें मनपसंद ना हो केवल परिवार की जरूरतें के कारण और  जीविका चलाने के लिए कार्य करना पड़ता हैI  वह अपनी सक्रियता जिंदगी से उब जाते हैं और प्रार्थना करते हैं कि जल्द ही इस प्रकार की नौकरी से छुटकारा मिले ताकि एक शांत भरी जिंदगी में या प्राकृतिक सौंदर्य वाले जंगलों में जिंदगी बताया जाए इन लोगों के बात  तो और भी बेबुनियाद लगता हैI  
मेरा धारणा इन लोगों से खुशियों के बारे में एकदम परे और अलग है ,मैं विश्वास करता हूं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है इसलिए  दुनिया छोड़कर शांत जीवन खुशियों की चाह पाने की कोई प्रश्न ही नहीं उठता I जहां तक की मैंने सोचा समझा और खुद के कड़वे और मीठे अनुभव के आधार पर खुशियां और आनन्द  के बारे में I 

 मेरे विचार से हमें अपने जीवन को खुशी का रंग भरने के लिए हमेशा सादा जीवन और उच्च विचार से भरपूर रहना चाहिए हम किसी पद पर भी आसन्न  हो हम अपने कर्तव्य को तब तक निष्ठा , नि:स्वार्थ  और इमानदारी के साथ करते रहे जब तक हम उस स्थिति में ना पहुंच जाए जो हमारे खुशियों के और सपने का पद हो अगर हम कोई भी कार्य  सही तरीके से नहीं करते हैं हम दूसरों के साथ ईमानदारी के बजाय कपटी और धूर्त , चालाकी  करते हैं, अगर हम सच्चे नहीं हैं तो हमारे जमीर और में खोंट  की वजह से हमारा जीवन भी एक खोटे सिक्के की तरह हो जाएगा I जिसमें हमेशा किंतु ,परंतु कोई ना कोई बहाना कि कारण खुशियां और आनन्द की प्राप्ति नहीं हो सकतीI  जब हमारे दिमाग और  शरीर ही तंदुरुस्त ना हो किसी कार्य करने के आगे हमें  दस बार सोचना पड़े तो हम खुश कभी नहीं रह सकते I इसलिए जो भी कार्य करे  जिसमें  हमारी रुचि हो यह कार्य सौंपा जाए उसे ईमानदारीपूर्वक दिलचस्प बनाकर करते रहना ही  हमारी खुशियां  और आनन्द  का असली कारण है I जो मनुष्य खुद की तुलना अपने बुरे दिन से अच्छे दिन को तब्दील करने में करता है रोज बीते हुए कल से आज की जिंदगी  बेहतर जीने में विश्वास करता है यकीन मानिए वही मनुष्य हमेशा ऊर्जावान और खुशी के साथ -साथ सकारात्मक विचार से घिरे रहते हैं और जो मनुष्य किसी भी कार्य को कपटी स्वार्थ भाव और तुलनात्मक तरीके  को सोच में रखकर करता  है वह  हमेशा असंतुष्ट रहता है और शायद अपने सगे -संबंधियों दोस्तों किसी की उम्मीद पर खरा नहीं उतरता I वह अपनी जिंदगी को अपने आप कठिन  बना लेता है और  मेरे विचार से खुशहाल जिंदगी का एक ही उपाय है कोई भी कार्य बिना डरे, बिना अत्याधिक उम्मीद के साथ व इमानदारी और  सच्चाई पूरी निष्ठा के साथ अपने सामर्थ्य के अनुसार पूरी तरीके से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन  दें और कर्तव्य करने की कोशिश करें वही मनुष्य अपने आप को स्वतंत्र और सकारात्मक विचार से भरपूर हो जाता है I खुशियों से लबरेज होकर अपनी दुनिया को आनंदमई बना देता हैI 

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