Tuesday, March 19, 2019

Essay in hindi on ग्रीष्म ऋतु | Summar Season पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

ग्रीष्म ऋतु हमेशा फ़ाल्गुन के शुरुआती दिनो के बाद यानी होली के बाद से ही होती है।जिसका  प्रभाव नवम्बर तक रहती है।गर्मी हर ऋतुओ के मुकाबले काफ़ि उबाऊ और   संघर्षपूर्ण होता है जिसे झेलना लोगो कि मजबुरी होती है। उस समय लू चलती रहती है।हमेशा तापमान उच्च रहता है,सूरज के प्रकोप को झेल पाना आसान नही होता।उस समय दिन कि अवधि बढ़ जाती है और रातें छोटी होती हैं I  फिर भी कंपकंपाती ठंड से राहत मिलती है क्योंकि ठंड हमेशा से ही केवल अमीरों को लिए बनायी जाने वाली ऋतू कहलाती है क्यूंकि उस समय यथासंभव सामर्थ्य लोग हि गर्म कपडे का उपयोग कर पाते  है  जिससे ठण्ड से बचा जा सके और बेघर और निर्धन लोग असमर्थ होने के कारण हमेशा ठण्ड के प्रकोप से काल के गाल में समा जाते हैं ।गर्मी के दिन शुष्क और नीरस होति है  लहलहाति धूप मे अपना रोजमर्रा जीन्दगी का कार्य करना असम्भ्व हॊता है ,जिससे आर्थिक रुप से भी लोगो को परेशानी झेलना पड्ता है ।दिन के साथ-साथ रात भी काफी गर्मी से प्रभावित होती है  जिससे  सोना भी काफी  मुश्किल होता हैI जल का स्तर काफ़ि नीचे चले जाने के कारण गर्मी मे पानी की काफ़ि किल्लत का सामना करना पड्ता है कुए ,तालाब,नहरे,नदिया के पानी सुखने लगते है ।
 जिसके वजह से पशु और मानव दोनो को प्यास के वजह से जान भी चली जाति है ,बिना जल जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। कृषि मे भी काफ़ी मुश्किलों  कि सामना करना पड्ता है फ़सल सूखने लगती है ,सूरज का प्रकोप से कोइ भी दैनिक कार्य कर्मवार ढंग से नही हो पाते । आधुनिक युग मे लोग वृक्षारोपण कि जगह वृक्ष  कि कटाई कि वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है,जानवरों को हरे- हरे पत्तियां घास नहीं मिल पाती है क्योंकि उस समय पेड़ गर्मी के प्रकोप से काफी सुख जाते हैं।    गर्मी का प्रभाव  केवल मनुष्य,जानवर पर ही नहीं बल्कि पेड़ -पौधों  पर ही पड़ती है इस तरह गर्मी में जीवन काफी कठिन हो  जाता है फिर भी अगर देखा जाए तो गरीबों के  गर्मी से ज्यादा कठिनाई कपकपी ठंड में आती है क्योंकि उस समय केवल उस मौसम के ढेर सारे कपड़े की जरूरत पड़ती है जो मध्यम वर्गीय वह उच्च वर्गीय लोग ही अपना मनपसंद अनुसार गर्म कपड़े खरीद कर ठंड के प्रकोप से बच पाते हैं।

 गर्मी के दिनों में बिना घर के भी लोग खुले मैदान में आसानी से कम कपड़ों में भी अपना जीवन व्यतीत कर सकते हैं,गर्मी में शहर में तो और पानी के लिए लंबी कतार लगाकर  घंटों समय बाद नगरवासियो को पानी कि नसीब होता है।उस समय गर्मी इतनी अधिक होती है की बार-बार नहाने में आनन्द मिलता है ,लोग सत्तू ,बेल आदि की शरबत और ठंडा पानी हमेशा पीते हैं फिर भी हमेशा प्यास की आभास होती है।  मकान की दीवारें और फर्श भी  गर्म होने लगते है जिसकी वजह से   बिजली वाले पंखे भी गर्म हवा देते हैं जिसके लिए बिना कूलर ,AC के गुजारा होना काफी  मुश्किल हो जाता है।  भारत में सामान्यत: 15 मार्च से 15 जून तक अधिक गर्म दिन  मानी जाती है।  उस समय संपूर्ण देश में तापमान वृद्धि होने लगती है । सूर्य उस समय  मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ता है, गर्मी हमारे लिए उपयोगी भी है  क्योंकि अगर गर्मी अच्छी पड़ती है तो मूसलाधार बारिश की संभावना काफी अच्छी होती है।  योग्य फसलें का उत्पादन में वृद्धि गर्मी के कारण ही होता है,हानिकारक कीटाणु नष्ट हो जाते हैं कई प्रकार के फलों और फूलों के लिए गर्मी का हो ना आवश्यक  है बिना गर्मी के फल अपने संपूर्ण अवस्था में सही ढंग से कभी भी फल- फूल नहीं सकते।  उत्तर पश्चिम भारत के शुष्क भागों में जो हवा चलती है जो काफी गर्म  होता है उसे लू  कहा जाता है गर्मी में सूर्य की किरणें  गर्मी में सूरज की किरने इतनी तीर्व होता है  कि दोपहर में भी मानो आग का गोला जैसा आभास होता है।  प्रकृति अपने नियमानुसार हमेशा ऋतु ,मौसमों में बदलाव करती है जो सही मायने में अनिवार्य है परंतु किसी भी ऋतु के अत्याधिक प्रभाव से जिंदगी जीवनहीन  हो जाती है , लू की वजह से बहुत सारे  मृत्यु भी हो जाती है परंतु इस ऋतु के उपयोगिता व उपलब्धता को को नजरअंदाज करना बेईमानी होगी।  गर्मी में स्वादिष्ट पेय पदार्थों का लुफ्त लेना  स्वास्थ्य के लिए भी काफी  लाभदायक के  होता है । आम के पेड़ों में मंजर स्वादिष्ट फलों  के रूप में तब्दील हो जाते हैं। ऐसे कई प्राकृतिक सौंदर्य के साथ -साथ जीवों की जरुरत का अभिलाषा की पूर्ति होती है । ग्रीष्म ऋतु  का हमें बेसब्री से इंतजार रहता है।  

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