Tuesday, March 19, 2019

Essay in hindi on रक्षाबंधन ! Raksha bandhan Festival पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

रक्षाबंधन भाई- बहनों के लिए महत्वपूर्ण पर्व है, यह प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैI बहन द्वारा भाई के राखी जिसे रक्षा सूत्र भी कहा जाता है उससे बांधने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता हैI राखी  रेशम धागे के डोर हो या रंग -बिरंगी कीमती आभूषण वाले राखी सभी  राखियों का एक ही महत्व होता हैI  भाई द्वारा बहन के हर संकट में रक्षा करना इसीलिए राखी को रक्षा -सूत्र भी कहा जाता है, हर  बहनें अपने भाई के राखी बांधती हैं इसमें उम्र की तुल्य नहीं होता बड़े हो या छोटे सभी भाइयों को बहनों द्वारा राखी बंधवाने के बाद हमेशा वचन दिया जाता है कि वे हर परिस्थिति में अपनी बहन को रक्षा करेंगेI इस पर्व  को लेकर भाई से ज्यादा बहनों में अत्याधिक उत्साह देखने को मिलती है, रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर  सभी नौकरीपेशा हों या व्यापार में या देश -विदेश किसी भी व्यवसाय से सम्मिलित बहने एवं भाई एक दूसरे के घर पहुंचकर इस खास मौके पर राखी बांधती है और अपने भाई को लंबी उम्र की दुआ करती हैं, वहीं पर भाई भी उनके स्नेह को बरकरार रख कर हर परिस्थितियों में उन्हें रक्षा व सहायता करने का वचन देता है Iहमें याद है बचपन के दिनों से ही रक्षाबंधन  हम दोनों भाई बहनों के लिए बहुत ही खुशियाँ वाला  पर्व हुआ करता था और आज भी हुआ करता है उस दिन हमेशा बहन का  हुक्म चलती है और बहन छोटी हो तो और भी जिम्मेवारी बढ़ जाती हैI रक्षाबंधन के दिन राखी के बाद भाई- बहन एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं और भाई कुछ उपहार के रूप में अपनी बहन को भेंट  देता है, रक्षाबंधन एक पवित्र त्यौहार  है जो भाई -बहन के रिश्ते को मजबूत करता है और दोनों को पवित्र प्रेम को  दर्शाता है, उस दिन भाई अपनी बहन की छोटी-मोटी गलतियों को माफ करता है और बहनें  अपने भाई की छोटी-मोटी गलतियों को माफ कर एक दूसरे को हर परिस्थितियों में एक होने की वचन देते हैंI 

  रक्षाबंधन पर्व क्यों मनाया जाता है ?इसके बारे अनेकों प्रचलित पौराणिक कथाएं हैं I  पहली कथानुसार यह महाभारत के युग में एक ऐसी घटना घटी जिस कारण इस त्योहार  को हर हिंदू धर्म में मनाया जाने लगा ,कहा जाता है कि श्री कृष्ण की एक मुंहबोली काकी थी जिनका नाम श्रुति था ,उनका एक पुत्रथा जो अष्टावक्र की तरह था जिनका नाम शिशुपाल था सभी लोग उससे दूर  रहते थे  क्यूंकि वह किसी गंभीर बिमारी से ग्रसित था ऋषि- मुनियों द्वारा एक बात बताई गई थी जिसमें कहा गया था कि जिसके भी स्पर्श से यह बच्चा स्वस्थ हो जाएगा उसी के हाथों इस बच्चे का मृत्यु तय है एक दिन श्री कृष्ण काकी के यहाँ आए और श्री कृष्ण उस बच्चे को पुकारते -दुलारते  हुए अपने गोद में खिलाने लगे और वह बच्चा स्वस्थ हो गया यह देखकर माँ  फूले नहीं समा रही थी परंतु मन ही मन परेशान हो गई क्योंकि ऋषि-मुनियों कहा  उसे भविष्यवाणी की याद आ रही थीI  अब मेरे बच्चे का जीवन श्री कृष्ण के हाथों में है इसलिए वह श्री कृष्ण से अपने बच्चे की रक्षा की वरदान मांगने लगी  और गलती होने पर क्षमा करने की प्रार्थना की जिस पर श्री कृष्ण ने उन्हें शिशुपाल को 100 गलती माफ करने तक के काकी को वचन दियाI 

 इसी प्रकार  दूसरी कथानुसार इंद्रदेव द्वारा असुरों  और देवताओं के युद्ध में इंद्र  को पराजित होना पड़ा था तो उस समय इंद्र की धर्मपत्नी ने भगवान विष्णु से मदद मांगी थी भगवान विष्णु ने साच्ची को जो कि इंद्र की धर्मपत्नी थी सूती धागे से एक हाथ में पहने जाने वाला वलय बना  कर दिया था जिससे उनके पति की रक्षा हो I बहुत सारी पुरानी कथाएं प्रचलित है जिससे यह सिद्ध होता है कि भाई और बहन की रक्षा और प्रेम के साथ-साथ नि:स्वार्थ रूप से किए गए भलाई के लिए यह पर्व मनाया जाता है भाई बहन के साथ-साथ पुरे परिवार  और समाज के भावनात्मक रिश्ते भी इस पर्व से बंधे होते हैं जो धर्म, जाति और देश के विभिन्न सीमाओं से बड़े होते हैं कुछ लोग वृक्षों को भी राखी बांधकर प्राकृतिक संरक्षण के रक्षा हेतु वचन देते हैं और लोगों को वृक्षारोपण के लिए जागरूक करते हैंI  रक्षाबंधन आता और स्नेह के बंधन से रिश्तो को मजबूत करती है यह सामाजिक और पारिवारिक शुद्धता का परिवारिक रूप से काफी महत्व वाला होता है यह  हमें एक प्रेम में बांधने का कार्य करता हैI  राखी, रक्षाबंधन आपसी रिश्ते को मजबूत करने का अवसर देता है और हमें अध्यात्मिक, सामाजिक रूप से परिपक्व बनाने में भी मदद करता है उस दिन तरह-तरह के लोग पकवान बनाते हैं और नहा धोकर भगवान का पूजा -अर्चना कर कर बहन विशेष आरती और पूजा कर उस दिन राखी भाई के कलाई  में राखी बांधती है I रक्षाबंधन का महत्व पुरातन काल से लेकर आधुनिक युग तक अतुलनीय है और हमेशा ही रहेगा I

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