Wednesday, March 27, 2019

Essay in Hindi on जवाहरलाल नेहरू | Jawalar lal Nehru पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे जिन्होंने हमारे देश के करीब 15 वर्ष प्रधानमंत्री के पद पर रहकर देश की नि:स्वार्थ भाव से सेवा की हैI  जब उन्होंने प्रधानमंत्री की  कुर्सी पर आसन्न  हुए थे तो बिखरे भारत जो अभी हाल ही में न जाने कितने महापुरुषों के बलिदान के फलस्वरुप स्वतंत्र हुआ थाI  उससे  स्वदेशी संविधान और एकात्मक करना आसान नहीं था परंतु उनकी देखरेख में राष्ट्रहित के अनेकों कार्य हुए भारत की उन्नति हुई और करीब 200 वर्षों तक गुलाम रहने के बाद भारत की आजादी में भी उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी I नेहरू जी  जन नेता थे जिनका प्रभाव जनता के हर वर्गों के लोगों तक थाI   उन्हें लोग प्यार से चाचा नेहरू भी कहा करते थेI नेहरू जी का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद वर्तमान में प्रयाग में हुआ था उनके पिता जो मशहूर और विद्वान वकील थे जिनका नाम पंडित मोतीलाल नेहरू था वह  पश्चिमी सभ्यता से काफी ही प्रभावित थे  और उनकी माता का नाम स्वरूप रानी नेहरू था ,  जो एक शिक्षित महिला थी  ,नेहरू जी एक शिक्षित और धनी परिवार से ताल्लुक रखते थे जो हर तरीके से ज्ञान में  भी समृद्ध थे I 
 शुरुआती दिनों में पंडित जवाहरलाल नेहरू के देखभाल  का कार्यभार एक अंग्रेजन के द्वारा संपन्न हुआ जिसका नाम एफ टी  ब्रुक्स था I नेहरू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा की शुरुआत घर से ही की पंडित जवाहरलाल नेहरू एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और देश के बड़े नेता राजनीतिक चेहरों के रूप में आजादी के पहले जाने जाते थे I सन 1914 में जब 15 वर्ष की आयु नेहरू जी की थी तब  शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गए, जहां उनका दाखिला वहां का सुप्रसिद्ध स्कूल हैरो  पब्लिक में हुआ ,इसके बाद उन्होंने बी एस एससी की परीक्षा  उत्तीर्ण उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से विज्ञान के द्वारा किया फिर उसी विश्वविद्यालय से पोस्टग्रेजुएट होकर सन 1912 में  बैरिस्टरी की परीक्षा पास कर के 7 वर्ष तक विदेश में अध्ययन करने के बाद नेहरू जी भारत लौटे थेI  उसके उपरांत भारत में ही उन्होंने बैरिस्टरी शुरू की और सन 1916 में उनका विवाह श्रीमती कमला नेहरू से हुआ I

चाचा नेहरू जी के  राजनीति में आने की शुरुआत  भारत के दुर्दशा के कारण हुआ उन्होंने काफी करीब से अंग्रेजों द्वारा अत्याचार और क्रूरता  वाली  व्ययवहार भारतीयों पर होते देखा Iहर भारतीय पर तानाशाही  रवैया देख कर  उनसे सहन नहीं हुआ और वह अन्य महापुरुषों की तरह ,स्वतंत्रता सेनानियों की तरह स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में कूद पड़ेI  एक आमिर व समृद्ध घर के शिक्षित व्यक्ति जो कभी शारीरिक संघर्ष ना देखा हो  उनके  लिए आंदोलन आसान नहीं था परंतु बिना शिक्षा के आप किसी को जागरूक और किसी के भावनाओं को विस्तृतात्मक तरीके से पेश नहीं कर सकते थेI  इसलिए नेहरू जी के आने के बाद कांग्रेस  काफी मजबूत हुआ उन्होंने बैरिस्टरी  को लात मार देश की तथा जनता की सेवा करने का संकल्प लिया I 1916 में ही जब लखनऊ में कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था तो उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई I महात्मा गांधी एक ऐसे शख्स थे जिनसे एक बार मिलने के बाद हर कोई उनका अनुयायी  और उनसे प्रभावित हो जाता था क्योंकि सादगी भरी जीवन और अपने आप को जनता के लिए  न्यौछावर करने वाले युगपुरुष के व्यवहार में जो ऊर्जा था और शायद ही आज के किसी भी नेता या युवा समाज के उन बड़े लोगों के ऊपर  जिनको देश का एक  अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है होगी I नेहरू जी   गांधी जी के  सबसे बड़े भक्त बन गए उन्होंने अपने बेशकीमती पोशाक उतारकर विलायती कपड़े को जलाकर सच्चे देशवासी की तरह स्वतंत्रता के युद्ध में कूद पड़ेI   गांधी जी के नेतृत्व में पूरी तरीके से स्वतंत्र आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया I उन्होंने   करीब से भारतीय जनता की गरीबी व लाचारी और अंग्रेज के बर्बरतापूर्ण आचरण का संज्ञान व देश की दुर्दशा देखा, सन 1921 में उन्होंने जालियांवाला बाग में हुए अंग्रेजों के अत्याचारों से जनता के बीच एक आत्मीय व जोशीला भाषण दीया जो आग में घी डालने का काम युवाओं में किया था I उन्हें इंग्लैंड के प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन पर काला झंडा दिखाई जाने पर पहली बार उन्हें जेल में भेज दिया गया ,पुण: जब वह जेल से लौटे भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रधान चुने गए और लाहौर में हुए कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष चुने गएI  नेहरू जी प्राय: 1930, 32, 34, 40 और 42 आंदोलन में  जेल का यात्रा करते रहेI  उन्हें 2 वर्षों तक नजरबंद भी रखा गया था जेल में वह पुस्तकों का अध्ययन करते और देश के आजादी पर गंभीर चिंतन व युवाओं के लिए पाठ व कविता लिखने का कार्य करते थेI 
    15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ तो सारी  जनता के मनमुताबिक उन्हें देश का प्रथम प्रधानमंत्री चुना गया जिस पर उन्होंने  अपने जीवन के अंतिम सांस तक काबीज रहे थे I नेहरू जी भारत के एक ऐसे जवाहर थे जिनकी कीमत लगाना हमारे शब्दों या किसी भी  आम इंसान के लिए काफी मुश्किल हैI  आज युवाओं को उनसे सीख लेकर उनके मार्ग पर चलने  से ही हमारे आज के देश की दुर्दशा और स्थिति आज खत्म होकर दुनिया का कल्याण हो जाएगी आज आधुनिक युग में लोग आपसी मतभेद एक दूसरे को ईर्ष्या और धोखे से नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं I वहीं नेहरू हर तरीके के शानो- शौकत को छोड़कर एक सादगी जीवन जीने की  कसम खाई थी , उनका व्यवहार मात्र अमल  करने से ही अपने आप में ही देश भक्ति की भावना जागृत होती है और हम ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहते हैं जिससे हमारी देश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब होI  इसलिए इन जैसे महापुरुषों को याद करना और उनकी बातों को अपने व्यवहार में अमल करना काफी जरूरी है क्योंकि नेहरू जैसे महान पुरुष  भारत में करीब 100 वर्षों के बाद एक जन्म  लेते होंगे I नेहरू जी की आत्मा अमर है और आज भी देशवासियों को सही मार्ग पर चलने को प्रेरित करती है I  

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