Saturday, March 2, 2019

Essay in hindi on महात्मा गांधी | Father of Nation Mahatma Gandhi पे हिंदी में निबंध (लेख )

भारत में अनेकों महापुरुष व महान व्यक्ति पैदा हुए हैं उन्हीं में से एक महापुरुष थे हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी  I  लोकप्रियता के साथ- साथ सादगी विचारधारा वाले महात्मा गांधी का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था ,वह अन्याय के सामने कभी न झुकने के कारण पूरा विश्व में प्रेरणीय हैI उन्होंने भारत के आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था उनके पिता राजकोट के दीवान थे जिनका नाम करमचंद गांधी था ,  माता का नाम पुतलीबाई था जो काफी अध्यात्मिक थीI  महात्मा गांधी अपनी मां के आध्यात्मिक विचार से काफी प्रभावित थेI उनसे प्रभावित होने की वजह  से ही हमेशा शाकाहारी जीवन व्यतीत कियाI संपूर्ण अहिंसा के मार्ग पर चलकर उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी जिसमे वो सफल हुए  जिससे  विश्वभर के लोगों में प्रेरणीय हुए Iगांधी जी ने अपने प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय प्राथमिक विद्यालय तथा उच्च विद्यालय में प्राप्त कीयाI   गांधीजी  ने खुद अपनी आत्मकथा में लिखा है कि मैं पढ़ने में  मेधावी छात्र नहीं था परंतु आज्ञाकारी और सब को आदर करने के कारण अपने  शिक्षकों के बीच काफी प्यारा था I बचपन में उन्होंने गलत संगत भी लगे परंतु जल्द  उन्हें अपनी गलती का आभास हुआ और सभी बुराइयों को त्याग दिए, गांधीजी मैट्रिक के इम्तिहान के बाद वे विधि व कानून की पढ़ाई करने इंग्लैंड 1887 में गए क्यूंकि उनके घर वाले चाहते थे की वह बैरिस्टर बनें I 
उन्होंने बैरिस्टर बन जाने के बाद में भारत  आए और कई मुकदमा लड़ें , मुंबई उच्च न्यायालय में अपनी वकालत आरंभ की इसी क्रम में उन्हें एक मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा जहां एक नौकरी पेशा गांधी को एक समाजसेवी व स्वंत्रता सेनानी   के रूप में बदल दिया गांधी जी को वहां भारतीयों के साथ  यूरोपियों द्वारा भेदभाव  और दुर्व्यवहार किया जाता था जो गांधी जी को अंदर से झकझोर के रख दिया I उन्हें भी क्रीमीलेयर का  शिकार होना पड़ा उन्हें एक रेलयात्रा के दौरान प्रथम श्रेणी की टिकट होने के बावजूद उन्हें रेल से धक्के मार के बाहर फेंक दिया गया  क्योंकि वह काले थे उस समय साउथ अफ्रीका में गोरे -काले रंगभेद और नस्लभेद जोरों पर थी I उन्होंने इस प्रकार के नफरतों को मिटाना चाहा और सभी भारतीयों और अश्वेतों को एकजुट कर विरोधियों से कानूनी लड़ाई लड़ा I गांधीजी की बातें मानो  कोई महात्मा व यशस्वी की तरह जादूगरी था  जो स्वन्त्रता की लड़ाई में अंग्रेजो के खिलाफ युवाओं को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही , वह अपने ज्ञान व बात के साथ तेजस्वी पुरुष मानो साक्षात ईश्वर के रूप थे लोग उनके बातों से  इतना  प्रभावित  होते थे कि लोग  जुर्म व अन्याय के खिलाफ अपने प्राण तक न्यौछावर कर के भी अन्याय के खिलाफ झुकते नहीं  थेI  उन्होंने चाहे दक्षिण अफ्रीका हो या भारत सभी जगह मजबूर और पीड़ितों  के हक में व उनके अधिकार के लिए अपने जिंदगी को समर्पित कर दिया I उन्होंने भारतीयों को न सिर्फ एकत्रित करने का काम किया बल्कि अंग्रेजों के तानाशाही नीति व अन्याय के खिलाफ की लड़ाई में बिगुल फूंक दीI  दक्षिण अफ्रीका  से लौटने के बाद गांधीजी भारत आए तो सामाजिक कार्यों में रुचि लेने की शुरुआत की और अपना संपूर्ण जीवन देश की सेवा करने का निश्चय किया और वो कांग्रेस में शामिल हो गए हैं जहां से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता की लड़ाई में तन- मन- धन तीनों  तरीके से लोगों को  शामिल कियाI 

 उन्होंने किसानों के साथ नील के खेती में जबरन अधिक वसूली और राजस्व की दर अधिक होने कारण किसानों की समस्या के निवारण के लिए चंपारण सत्याग्रह की शुरुआत की जो उनकी पहली सत्याग्रह थी I गांधी जी के राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले थे जो एक सम्मानित नेता व आदर्श इंसान के रूप में जाने जाते थे गांधी जी की पहले ही आंदोलन से  तानाशाही ब्रिटिश शासन के  खिलाफ मिली जीत  मजदूरों  और किसानों के  जागरूक करने का कार्य किया I मजबूरियों का फायदा उठा रहे व शोषण कर रहे अंग्रेजो के खिलाफ उन्होंने अहिंसापूर्वक सत्याग्रह कर उन्हें घुटने टेकने पर और अपने शर्त लागू करने पर मजबूर किया उन्होंने देश में शराब,बुराइयां वह दुर्गुणों से सभी युवाओं व नागरिक को  इससे दूर रहने के लिए कहा उन्होंने विदेशी वस्त्रों के बजाय स्वदेशी परिधानों की तवज्जो दीI  उन्होंने गरीब तबके में बुनकरों के विकास के  लिए चरखा से  खादी वस्त्रों का निर्माण के लिए प्रोत्साहन कियाI असहयोग आंदोलन का शुरूआत किया जो पूरे देश में प्रभावकारी तरीके से लोगों को अंग्रेजों के विरुद्ध अहिंसक रूप से विरोध करके अपने हक के लिए लड़ने के लिए जागरूक करने का मकसद काफी हद तक कामयाब हुआI  इसके बाद 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन ,1942 का  भारत छोड़ो आंदोलन  अभी तक के सभी आंदोलनों में सबसे ज्यादा प्रभाव कारी अनंत समय तक  चलने वाला आंदोलन था I गांधीजी न जाने कितनी बार अपने भारतीय भाइयों के लिए शरीर पर लाठी- डंडे खाएं कितनी बार आमरण अनशन करके  लोगों को न्याय दिलवाया I गांधी जी को अंग्रेज सरकार समय-समय पर जेल भेजता रहा क्योंकि उन्हें मालूम था कि यह  एक सादगी जीवन बिताने वाला व्यक्ति कोई साधारण व्यक्ति नहीं है बल्कि यह भारत के ही नहीं पूरे विश्व के आजादी का प्रतीक है दुर्भाग्यपूर्ण गांधी जी ने अपने सामने 1947 में भारत को स्वतंत्र होता हुआ तो देख लिए परंतु अपने ही देश के एक अभागे के  कारण जिसका नाम नाथूराम गोडसे था गणतंत्र  भारत के स्वशासन नहीं देख पाए I हमारे स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गांधी सत्य और अहिंसा की महान हथियार थे उन्होंने विश्व के कल्याण के लिए अनगिनत कार्य किया जो न सिर्फ भारत बल्कि विश्व इनसे सीख ले कर आजादी के लिए अंग्रेजों के विरुद्ध बिगुल फूंक दिया दुर्भाग्यवश 30 जनवरी 1948 को वह हमेशा -हमेशा के लिए सो गए परंतु गांधी जी आज भी सभी के दिल में जीवित हैं और लोगों को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं | 

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