Tuesday, March 12, 2019

Essay in hindi on दुर्गा पूजा (दशहरा) | Durga puja Dusharra festival पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

दुर्गा पूजा को दशहरा ,विजयदशमी और नवरात्र कहा जाता है I यह हिंदुओं का प्रसिद्ध त्योहार हैI  यह पर्व  बंगाल, बिहार, झारखंड ,उत्तर प्रदेश सहित पुरे देश  में बड़ी ही धूमधाम से मनाई जाती हैI  दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है ?इसके बारे में बहुत सारे पौराणिक कथाएं प्रचलित है ,परंतु कुछ प्रसिद्ध कथाओं में से  एक कथा आज ही के दिन श्री रामचंद्र ने रावण का वध करके  लंका में विजय प्राप्त की  थीI जिसके फलस्वरूप विजय दशमी अर्थात दशहरा का पर्व धूमधाम से पूरे देश में मनाया जाता है I उस दिन ना केवल लंका,अयोध्या बल्कि स्वर्गलोक  से लेकर पाताललोक तक सभी जगह लोग ढोल- नगाड़ों के साथ अध्यात्मिक भजन- कीर्तन गाकर, वंदना कर अधर्मी रावण के आतंक से हमेशा के लिए मुक्त होने पर भगवान राम ,लक्ष्मण, सीता सहित उस युद्ध में शामिल होने वाले हर वीर योद्धाओं का स्वागत किया गया थाI 

  दूसरी कथानुसार एक बार मां दुर्गा ने महिषासुर को चंडी  का रूप धारण कर आज ही के दिन उस नृशंस  के अत्याचारों से मुक्ति प्रजा में दिलाई थी उसी दिन से  यह उत्सव मनाया जाता हैI  कहने का आशय यह है कि कथाएं चाहे जो भी हो जिनमें देवी-देवताओं की अलग-अलग भूमिका रही परंतु इसे सत्य की विजय और असत्य की पराजय ,धर्म की विजय अधर्म का नाश से जोड़कर देखा जा सकता है I सद्बुद्धि व  धर्म के रास्ते पर चलने वाले हमेशा कामयाब और एक इंसान बनने में सफल होते हैं, हमें यह पर्व यही सिखाता है इसी खुशी में भारत के लोग दुर्गा पूजा का पर्व मनाते हैं और यह  दस दिनों तक पूजा -पाठ ,उपवास के साथ इस पर्व को मनाया जाता हैI  इस दिन सभी लोग अपने किए गए मनमुटाव को दूर कर आपसी भेदभाव को भूलकर एक दूसरे को गले लगाते हैंI  

 दशहरा  अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की शुरुआत में कलश स्थापन से प्रारंभ होती है उसी दिन पूजा -अर्चना और  देवी शक्ति की नौ रूपों की प्रत्येक  दिन विशेष पूजा होती है जो कि दसवीं दिन समाप्त होती हैI  उसी के उपरांत  सप्तमी, अष्टमी ,नवमी को बड़ी ही धूमधाम से दशहरा अर्थात दुर्गा पूजा मनाया जाता है ,विभिन्न प्रकार के आकर्षक व सुंदर मां देवी की मूर्तियों के साथ -साथ मां सरस्वती, भगवान श्री गणेश ,भगवान कार्तिक की मूर्तियां स्थापित की जाती है I कहा जाता है की मां दुर्गा  हर नवरात्र में अलग -अलग सवारी पर सवार होकर आती है परंतु प्रतिमा में हमेशा शेर पर सवार व उनके चरणों में महिषासुर राक्षस रहता है जिसके सीने में मां के हाथों से निकले शस्त्र से वध का चित्रण  दर्शाया जाता है I दशहरा  आने के  करीब दो  माह पहले से ही लोग चंदा एकत्रित करते हैं और देश के विभिन्न राज्यों में बड़े-बड़े आकर्षक पंडाल लगाए जाते हैंI  सबसे अधिक दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल में  प्रसिद्ध है क्योंकि वहां भव्य  तरीके से विशालकाय व मनोरम पंडालों को देख कर बच्चे, बूढ़े ,नौजवान, महिलाएं सभी मनमोहित हो जाते हैंI  वहां अन्य राज्यों से अलग मां दुर्गा के मूर्ति का रूप दिया जाता है I  नवमी के दिन ही मूर्तियों का हवन करने के बाद विसर्जन कर दिया जाता है जबकि अन्य राज्यों में दशमी  तक यह पूजा चलती है नवमी तक दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है दशमी को हवन  की  समाप्ति होती है इस अवसर पर रामलीला व विभिन्न अध्यात्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता हैI  कहीं-कहीं गांव ,छोटे शहरों में रामायण का मंचन  किसी अध्यात्मिक गुरु का प्रवचन और नाटक आदि खेल जाते हैंI  नौ दिन फल खाकर इस नवरात्रि का उपवास रखते हैं यह पर्व हमें दुर्गुण विचारों को दूर कर हमेशा सकारात्मक सोच और इंसानियत धर्म निभाने का सीख देता हैI  इसमें  न केवल हिंदू धर्म के लोग शामिल होते हैं बल्कि हर समुदाय हर धर्म के लोगों का इसमें अभिन्न योगदान होता हैI  बंगाल में तो सबसे अधिक पंडाल मुस्लिमों-हिन्दुओं  के संयुक्त प्रयास से  पंडाल का निर्माण ही नहीं बल्कि पूरा आयोजन किया जाता है I  दशहरा हमें हमेशा सही धर्म और सत्य के साथ चलने को प्रेरित करता हैI दशहरा में गुजरात में सबसे अधिक नौ दिन डांडिया  खेला जाता है ऐसे भी जगह हैं जहां विभिन्न राज्यों में विभिन्न प्रकार के गीतों का आयोजन दशहरा के अवसर पर होता है I दशमी के दिन एक बड़े  मैदान में  विशालकाय रावण का पुतला बनाकर कोई अभिनेता या रंगकर्मी देवताओं का रूप धारण कर  राम,लक्ष्मण हनुमान, सीता जी का रूप में होते हैं I  श्री राम अपने तीर से जिस में आग जला होता है रावण के सीने में  चलाते हैं  और इस प्रकार रावण जो की बुराई व अधर्म का प्रतीक है उस दिन भस्म  किया जाता है I भारतीय परिवारों में अच्छे कामों का शुभारंभ इसी दिन से किया जाता है सप्तमी से ही मां देवी और अन्य  देवताओं के पट खुल जाते हैं या पंडालों में मूर्तियों को पवित्र स्थान पर स्थापित की जाती हैI  जिसकी पूजा दशमी  तक चलती है उसी उपरांत सप्तमी से सभी अपने घरों से नए-नए कपड़े पहन कर  मेले और पंडालों  में विभिन्न प्रकार के मूर्तियों का दर्शन कर आनंद लेते हैं I कहते हैं कि भगवान राम ने भी मां दुर्गा की पूजा की थी और मां दुर्गा की ही सहायता से लंका पर विजय प्राप्त किया था आदि शक्ति की अनेकों रूप है I नौ दिन इस पर्व में  उनके सभी रूपों में पूजा -अर्चना की जाती है लोग नाच- गान ,संगीत मनोरंजन के और भी साधन के साथ- साथ आनंद व खुशियों की लहरों में सरोबार  रहते हैं सभी लोग नए- नए कपड़े पहन कर एक दूसरे के घर जाकर स्वादिष्ट व्यंजनों का लुफ्त उठाते हैं  बच्चे और स्त्रियों में विशेषकर इस पर्व का उल्लास उत्साह देखने को मिलती है अतः दुर्गा पूजा एक बड़ा ही प्रसिद्ध और  अध्यात्मिक पवित्र पर्व है जो हमें हमेशा सद्बुद्धि व नैतिक कार्य के प्रति प्रेरित करता है I 

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