Tuesday, March 26, 2019

Essay in Hindi on बाल विवाह | Child Marriage पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

वैसे विवाह जिनमें लड़कियों की उम्र 18 वर्ष के कम हो और लड़के का 21 वर्ष से कम हो उनके संपन्न विवाह को बाल विवाह के श्रेणी में रखा जाता है I इस प्रकार के विवाह पूरे दुनिया में प्राचीन समय में प्रचलित थी परंतु भारत में तो 18वीं - 19वीं सदी में हमेशा बाल विवाह ही होते थे अभी भी संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बाल  आपात निधि रिपोर्ट के अनुसार संपूर्ण भारत में विश्व के 40% बाल विवाह होते हैंI  बाल विवाह समाज के असमानता व  शिक्षा -अशिक्षा संकीर्ण  विचार से घिरे होने के कारण होता है जो असंतुलित के साथ- साथ स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी घातक है I जरा सोचें जो शरीर के लिए हर उम्र के अनुसार क्रियाकलाप बनाया गया है 5 वर्ष से 25 वर्ष की आयु शिक्षा ग्रहण  कर नौकरी सभी गंभीर जिम्मेदारी कार्य को करना होता है परंतु हमारी सीमित सोच वह प्राचीन परंपरा को जीवंत रखने का प्रयास के कारण आज भी ग्रामीण और  छोटे नगरीय क्षेत्रों में अधिक बाल विवाह होते हैंI  विश्व से बाल विवाह का प्रचलन धीरे धीरे नगण्य  हो चुका है परंतु आज भी भारत में बाल विवाह होती हैI 
 भारत की जनसंख्या की आबादी समाज में अलग-अलग धर्म अलग- अलग परिवेश में अलग-अलग कुरीति जिंदा है जो अपरिपक्व और बाल विवाह के हानी से अनजान होने कारण होता है I  बाल विवाह की प्रथा  के बारे में कहा जाता है कि भारत में पहले नहीं होता था परंतु जब राजशाही शासन व्यवस्था प्रचलन में हुई तब से लड़कियों और लड़कों को तस्करी और विदेशी शासकों से यौन शोषण से बचाने के लिए मजबूत  सुलझा उपाय की तरह हुआ ,इससे भी अधिक परिवार की वह लोग जो हमेशा समाज वह विस्तृत परिवार देखना चाहते थे जो पुत्र और पौत्र  की यथाशीघ्र  कामना करते थे उनके कारण यह  पूरी तरीके से  लागू  हुआ उसके साथ -साथ रूढ़िवादिता और जैसा कि सभी को पता है की तिलक -दहेज में खर्चे  की मसला लड़कियों को भेदभाव का शिकार के साथ -साथ परिवार के लोग द्वारा ही असमानता  व्यवहार  के कारण और प्रचलित हुआ I  वैसे लोग जो कम पढ़े -लिखे व समाजिक  विकास के साथ- साथ शारीरिक विकास  की क्रियाविधि व अपने कर्तव्य को न समझ पाते हैं उन प्रकार के लोग हि बाल विवाह के समर्थक और आयोजक होते हैंI  अधिकतर ग्रामीण परिवेश में अभी भी लड़कियों को शिक्षा अधिकार तो दिया गया है परंतु तुलनात्मक रूप से लड़कों की अपेक्षा स्वतंत्रता और अपने मनपसंद नौकरी ना करने की सलाह  दी होती हैI 

 भारत में करीब ६० फ़िसदि लोग गरीबी रेखा से आते हैं जो विशेषकर लड़कियों को दहेज व तिलक के  आधार पर एक बोझ समझते हैंI उनका मकसद होता है  कि किसी प्रकार से बच्चियां 13 या 14 वर्ष की हो जाए कुछ प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण कर ले व घरेलू कार्यों के तौर- तरीके को जान ले उसके बाद उनकी शादियां करा दी जाती हैI  लड़कों में  भी इस प्रकार के कारण होते हैं परंतु लिंगानुपात की नजर से देखा जाए तो लड़कियां बाल विवाह के अधिकतर शिकार होती हैंI  बाल विवाह के केवल दुष्परिणाम  ही होते हैं जिनमें जान तक की जाने की डर बनी रहती है क्योंकि बिना परिपक्वता व कम उम्र में माता बन जाने के कारण उनकी शारीरिक वृद्धि रुक जाती है उनकी दिमाग सक्रिय नहीं रह पाता है जिनसे उनके दिमाग मानसिक तनाव  और सिमित दायरे में सिमट जाती हैI  समाज के तौर तरीके का आधे- अधूरे ज्ञान को जानकर वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों के दबे होने के कारण ना तो अपना विकास कर पाते हैं और ना ही समाज में एक सभ्य  के साथ -साथ आर्थिक संपन्न इंसान बन पाते हैं I बहुत सारे  लोग गुप्त रोग के साथ- साथ महामारी या फ़ैलने वाली बीमारी भी बाल विवाह के कारण ही होता हैI  जरा सोचें एक छोटे से वाहन पर  अगर हम अत्याधिक बोझ डालते हैं तो वाहन उस भार के तले दबकर खुद ही क्षतिग्रस्त हो जाएगा, उसी प्रकार हमारा शरीर का बनावट है वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो हर क्रियाकलापों के लिए समय बनाया गया हैI  अगर हम बाल विवाह के समर्थक या बढ़ावा  देते  हैं तो इस दुनिया में एक घृणित अपराध के भागीदारी बन जाते हैं I बाल विवाह शिक्षा व उसके होने वाले दुष्परिणामों को बता कर लोगों को  जागृत कर खत्म करने का प्रयास हो रही है और हमेशा किया जाता है फिर भी कुछ अशिक्षित  परिवारों के  परंपरा वह अंधविश्वास कारण आज भी बाल विवाह पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हो पाता इसी कारण आज भारत न सिर्फ आर्थिक बल्कि बुद्धिमता में भी अन्य देशों के मुकाबले काफी पिछड़ा हुआ है,प्रत्येक नागरिकों का कर्त्तव्य है इससे होने वाले दुष्परिणामों से लोगो को अवगत कराएं I   

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