Monday, March 25, 2019

Essay in hindi on छठ पूजा | Chatth Puja of Bihar पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

छठ पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी के दिन  मनाया जाने वाला एक हिंदू पर्व है I प्रमुख रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश में मनाया जाता हैI छठ  बिहार के सबसे महान  पर्व  है जो आस्था और अध्यात्म का प्रतीक हैI  यह त्यौहार काफी कठोर नियम और अनुष्ठान के साथ चार दिनो में सम्मिलित होता है इसमें सबसे पहले स्नान कर खरना ,निर्जला उपवास करना होता है इसमेंप प्रकृति को मानव जगत के लिए दिए गए उपहार और सर्वोच्च जगत के लिए सूर्य  द्वारा जनजीवन को चलाने के लिए मनुष्य द्वारा सूर्य भगवान को धन्यवाद किया जाता हैI  परंतु इस पर्व को क्यों मनाया जाता है इसके पीछे पौराणिक महत्व और कथाएं छिपी हुई हैI छठ पर्व आस्था का महापर्व के रूप में जाना जाता है बिहार और झारखंड में तो अधिकतर संख्या में मनाया जाता है वैसे अब देश के हर कोने में  विदेशों में भी छठ पर्व धूमधाम से मनाया जाता हैI

 कहा जाता है कि एक एक राजा प्रियवंद  थे जो नि:संतान थे उन्होंने महर्षि कश्यप के  आज्ञानुसार यज्ञ  करा कर अपनी पत्नी मालिनी  को यज्ञ आहुति के लिए  बनाई गयी खीर प्रसाद के रूप में दिया उन्हें पुत्र प्राप्ति तो हुआ परंतु वह मृत थाI प्रियवंद काफी दु:खी हुए और पुत्र के मृत्यु के वियोग में प्राण देने की ठान  ली , उसी क्षण भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई औ उनसे कहा  कि मैं सृष्टि के मूल प्रवृत्ति के छठे  अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं  मैं षष्ठी हूं- हे राजन तुम मेरी पूजा करो और दूसरों को भी मुझे पूजने की प्रेरित करो राजा ने षष्ठी  का उपासना कर व्रत किया जिससे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई यह पूजा कार्तिक शुक्ल स्वस्तिक हुई थी सस्ती हुई थी इसलिए छठ मनाया जाता है

 दूसरी कथा अनुसार लंका पर विजय पाने के बाद जब  रामराज्य की स्थापना हुई उस दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और मैया सीता ने भगवान  सूर्य की आराधना किया था और उपवास रखा थाI  उस समय कार्तिक शुक्ल षष्ठी था कहा जाता है उसी समय से  यह पर्व प्रचलन में आयाI  और भी पुरानी कथा जो देव माता अदिति पर आधारित है कार्तिक शुक्ल  के षष्ठी  के दिन यह व्रत मनाए जाने के कारण इसका नाम छठ व्रत पड़ाI  जो की  सूर्य उपासना के लिए प्रसिद्ध हैI  

छठ पर्व चैत्र में भी मनाया जाता है बनाए जाने वाले पर्व को  चैती छठ कहा जाता है  पारिवारिक, सामाजिक, सुख- समृद्धि तथा मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए यह पर्व मनाया जाता है I इस पर्व के लोग निजी व सामाजिक बुराइयां को दूर कर विश्व में शांति और सार्वजनिक उत्साह का कामना करते हैंI  यह उत्सव स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से इस पर्व को विधि अनुसार बनाते हैं कथा चाहे जो भी हो परंतु इसमें सूर्य देव और छठी मैया का पूजन का विशेष महत्व हैI  बिहार, झारखंड से होते हुए पूरे देश में प्रसिद्ध होने के साथ-साथ अब विदेशों में भी प्रसिद्ध है प्राय देखा जाता है कि हिंदू धर्म के साथ साथ अन्य धर्म के लोग भी इस पर्व के प्रति काफी आस्था रखते हैं और विधि अनुसार इस वर्ष को उत्साह पूर्वक करते हैं I औरतें दौरा सजाती हैं नहाय -खाय  के बाद एक दिन खीर, ठेकुआ का प्रसाद बनाकर खाया जाता है व कुएं के पानी पिया जाता है I जो कि यह विधि रात्रि में या  शाम को किया जाता है व्रतियों को प्रसाद ग्रहण के बाद परिवार, आसपास के लोग सभी लोगों में इस प्रसाद को बांटा जाता हैI  उसके दूसरे दिन  डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाता हैजाता है और उसके दूसरे दिन उगते हुए सूरज को  अर्ध्य  दिया जाता है I इस उपरांत दोनों अर्ध्य  के दौरान पुरुष और महिलाएं जो व्रत किए होते हैं को  वह जल तक ग्रहण नहीं करते दिन में सूर्योदय में अर्ध्य देने के बाद प्रसाद खाकर  पारण किया जाता हैI    छठ के प्रसाद का काफी महत्व है लोग नदियों व तालाबों में जाकर इस व्रत को करते हैं शहरों में जहां नदियां ,तालाबें  ना होने पर अपने घर के ऊपर जल पात्र बना कर अर्ध्य   देते हैं I महिलाएं एवं पुरुषों द्वारा जिस प्रकार शादी व विवाह के गीत का काफी महत्व होता है उससे भी अधिक सुंदर व सुहानी छठ के गीत होते हैं जिन्हें पुरुष एवं महिलाएं दोनों मिलकर छठ गीत को गाते हैं छठ काफी महान पर्व  है इसमें जिसके माध्यम से हम प्रकृति आस्था से रु-ब-रु होते हैं I 

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