Friday, February 1, 2019

Essay in hindi on डाकिया | Postman पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh


वैसे डाक विभाग में कार्यरत व्यक्ति जो पत्र,मनी-ऑर्डर आदि दूसरे घर तक पहुंचाने का कार्य करता है उसे डाकिया कहते हैंI डाकिया की नियुक्ति सरकार द्वारा किया जाता है और सरकार से ही उनका आजीविका चलती है अर्थात सरकार द्वारा ही उनकी वेतन दी जाती हैI  डाकिया का ड्रेस खाकी पैंट , खाकी कमीज ,खाकी टोपी या पगड़ी होती है जो अपने साथ खाकी रंग का थैला या चमड़े का थैला लिया रहता है जिसमें पत्र ,मनीऑर्डर आदि संबंधी कागजात भरे होते हैंI अगर हम आज से करीब तीन दशक पहले की बात करें जब विज्ञान का प्रभाव  संचार माध्यम में थोड़ा कम था तब उतनी मोबाइल, कंप्यूटर आदि जैसे उपकरणों का वर्चस्व नहीं था तब  एक दूसरे का हाल-चाल या किसी दूसरे स्थान पर पैसे और तोहफे आदि  पहुंचाने का कार्य पत्र,मनीऑर्डर आदि के माध्यम से ही की जाती हैI   गांवों, कस्बों ,शहरों  आदि सभी जगह पर पत्र के माध्यम से हि एक दूसरे को सुख -दु:ख का  समाचार लेते या किसी प्रकार के आर्थिक सहायता हो या कहीं दूर अपने भाई को राखी भेजना हो या किसी विशेष पर्व के सामग्री हो सभी डाकिया के माध्यम से ही संभव हो पाता है Iआज भी तकनीकी रूप से सक्षम होने के बावजूद पत्र और मनीआर्डर , डाकपोस्ट आदि का  प्रचलन कम नहीं हुआ हैI  डाकिया हमारे लिए हर मौसम व परिस्थितियों में भी काम  करता है चाहे धूप हो या मूसलाधार बारिश,कंपकंपाती ठंड में भी  घर- घर जाकर परिवार को खबर देता हैIहमारे मुस्कान को बढ़ाने में डाकिया का सहयोग अतुलनीय है ,डाकिया की जिंदगी में शायद ही कभी फुर्सत  के पल हो I 

गांव की डाकिए की जिम्मेदारी  थोड़ी और बढ़ जाती है पत्र, टिकट ,पोस्टकार्ड आदि भी बेचने और प्रबंध करने का कार्य करना पड़ता है मुझे अपने बचपन के दिनों की बात याद है जब हम अपने गाँव से बाहर शहर में पढ़ाई के लिए रहते थे तो पत्र व मनीआर्डर द्वारा हमारी घर का मनोदशा व वर्तमान स्थितियां  हमारे तक पहुंचाने का कार्य डाकिया द्वारा ही की जाती थी कभी छुट्टी कम होने के कारण रक्षा बंधन में घर न पहुंच पाने पर मलाल रहता पर बहन का प्यार व आशीर्वाद रक्षाबंधन के ठीक दो  दिन पहले राखी के माध्यम से हम तक पहुंच जाता I इस प्रकार न जाने कितने घड़ी में हमारी मुस्कान को दुगना करने का कार्य डाकिया करते हैं ,उनकी वजह से  हम आर्थिक वह मानसिक रूप से तन- मन से प्रसन्न रहते हैं I  डाकिया बेहद ही संवेदनशील और मिलनसार स्वभाव के होते हैं वह समाज के लिए बड़ा ही उपयोगी सेवक हैं डाकिया हमारे सुख-दु:ख, शुभ -अशुभ सभी प्रकार के समाचार सुनाता है इसलिए उसकी सेवाएं को भुलाया भी नहीं भुलाया  जा सकताI प्राचीन समय से उनकी हालात में थोड़ी सुधार हुआ है फिर भी वह पर्याप्त नहीं है उनके वेतन काम के अनुसार काफी कम है उनका काम जितना कठिन है उतना ही कम उनकी सैलरी जो उनके परिवार के लिए सामर्थ्य  नहीं है I

 डाकिया को अपने कर्तव्य निर्वाहन करने के लिए कभी -कभी मुश्किल परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है, कभी -कभी रास्ते में असामाजिक तत्वों,उपद्रवियों  द्वारा उनका थैला और बटुआ छिन लिया जाता  है और उन्हें पीटा भी जाता हैI  उसके बाद लूट और शारीरिक शोषण के बावजूद उन्हें अफसरों  के सामने लूट के लिए सफाई देनी पड़ती है, कभी- कभी वैसे गांव या  कस्बा में जहां वाहन की सुविधा न हो  वहां पैदल या साइकिल के माध्यम से जा कर लोगों को  घर-घर पत्र पहुंचाने का कार्य करना पड़ता हैI  डाकिए के थैले में सुख- दु:ख के अनेकों संदेश भरे होते हैं इसी कारण वह सब का प्रिय है चाहे वह नौकरी की तैयारी करने वाला युवक हो या विदेशों और गांव से कोसों दूर महानगरों में कार्यरत मजदूर या कर्मचारी,सभी की खुशियों का माध्यम डाकिया बनता है इसलिए सभी लोग उसे दिल से स्वागत करते हैं और कोई भी शुभ समाचार में उन्हें बख्शीस   के तौर पर उपहार या खुशीपूर्वक पैसे दिए जाते हैं, इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि डाकिया हमारे समाज के लिए बड़ा ही उपयोगी सेवक है जो अपने परेशानियों को छुपा कर हमारे खुशियों के लिए सेवा में हमेशा  सक्रिय रहता हैI 

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