Sunday, February 17, 2019

Essay in hindi on पुस्तकालय | Library पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

वह स्थान जहां विभिन्न प्रकार के पुस्तकों का संग्रह होता है उसे पुस्तकालय कहते हैं I जहां सभी लोग एक-साथ बैठकर अपने पसंदीदा और ज्ञानवर्धक किताबों का अध्ययन करते हैं या दूसरे शब्दों में पुस्तकों का घर को पुस्तकालय से संबोधन किया जाता हैI  पुस्तकालय से अपने आप में खास और विशेष लगाव प्रत्येक पाठकों के बीच  होता है क्योंकि यहां पर हर विचारधारा ,विषयों व लोगों के मनपसंद पुस्तकें हमेशा उपलब्ध रहती है जिससे मनुष्य का ज्ञान विस्तार होकर एक अच्छा चरित्र वाला इंसान बनने में प्रेरित करता है और जीवन के पथ पर हमेशा विकास के बयार की ओर निकलता हैI इसलिए पुस्तकालयों में हमेशा अच्छी-अच्छी कंटेंट और विषयों वाली पुस्तके होती हैं I अच्छी पुस्तकों  की संग्रह और सुचारु और सक्रियता से पुस्तकालय अपने आप में  शिक्षा का अलख जगाने का काम करती है चाहे वह नैतिकता से जुड़े हो या स्वास्थ्य या किसी अन्य विषय से जुड़े पुस्तकें ना सिर्फ पढ़ना बिल्कुल उसे अपने व्यवहार में हमेशा अमल  करने से हमारे पुस्तकालय जाने का आशय  पूरा होता हैI  पुस्तकालय हमारे जीवन के  साथ-साथ मन को ज्ञानी बनाता है जहां से हमारे विचारों का आदान-प्रदान व सूचनाओं से हमारे मन में  ढेर सारी खूबसूरत व उपयोगी विचार उत्पन्न होते हैंI  यहां से देश- दुनिया की नई और पुरानी बातें उनकी नीतियां उनके संस्कृति, वेशभूषा आदि सभी चीजों से रूबरू होने का सौभाग्य प्राप्त होता हैI 
पुस्तकालय में वैसे हर तरह  की कीमती  पुस्तकें उपलब्ध रहती है जिसे आम लोग आसानी से खरीद नहीं पाते हैं यहां कम से कम शुल्क में पुस्तकें आसानी से पढ़ लेते हैं पुस्तकालय हमारी शिक्षा में जागरूकता  पैदा करता है अक्सर देखा जाता है कि  जहां पुस्तकालय निर्मित होती है उनके स्थानों पर भी रहने वाले लोग भी काफी बुद्धिजीवी व सुचारू रूप से पाठक हो जाते हैंI  पुस्तकालय सभी लोगों के दिल में रुचि पैदा कर खुद प्रभावित होकर अध्ययनशील  बन जाने में काफी सहायक है इस बात का महत्व सभी जानते हैं कि बिना शिक्षा का मनुष्य कभी विकासशील और अग्रसर पथ पर  नहीं बढ़ सकता परंतु पुस्तकालय न सिर्फ शिक्षा बल्कि उसके साथ -साथ मनोरंजन के लिए भी एक बहुत ही अच्छी साधन है I पुस्तकालय में कुछ लोग मनोरंजन के लिए भी जाते हैं परंतु यहां का मनोरंजन का माध्यम भी अध्ययन हीं है जो हास्य  लेखन वह काल्पनिक ,आनंदित कहानियों से मिलती है जो न सिर्फ बच्चे, युवा बल्कि बूढ़ों को भी काफी लुभावनी होती हैI  इस प्रकार यह कहना  अनुचित नहीं होगा की पुस्तकालय मनुष्य के चरित्र के निर्माण में और अध्ययन के साथ -साथ मनोरंजन का भी आनंद देता हैI 

 पुस्तकालय तीन प्रकार के होते हैं  -(1 )व्यक्तिगत पुस्तकालय(२) सार्वजनिक पुस्तकालय और राजकीय पुस्तकालय 
व्यक्तिगत पुस्तकालय- इसका  संगठन  काफी कम जगहों पर होता है और इसका संचालन कोई विद्या प्रेमी ही कर सकता है इसमें वह अपने निजी पैसों से  मनपसंदनुसार पुस्तके खरीदता है और इनका संग्रह करता है इन पुस्तकों का उपयोग अपने परिवार उनके आसपास रहने वाले गहरे दोस्त  करते हैंI 

 सार्वजनिक पुस्तकालय - यह पुस्तकालय सभी लोगों के सामूहिक योगदान से खोला जाता है जो जनता के लाभ के ध्यान में रखकर पुस्तकें खरीदी जा सकती है जहां नैतिकता, धार्मिक, ज्ञान- विज्ञान, खेल, देश- नीतियां, राजनीति व भूगोल के विषयों की पुस्तकें अधिक मात्रा में पाई जाती है यहां अक्सर देखा जाता है कि लोग समूहों में बैठ कर न सिर्फ पाठ का अध्ययन करते हैं बल्कि एक दूसरे के साथ विचार विमर्श भी करते हैंI 
 राजकीय पुस्तकालय -जब सरकार या राज्य अपने खर्च से जनता की सुविधाओं के लिए पुस्तकालय खोलता है जिसमें ज्ञान- विज्ञान ,सामान्य अध्ययन के साथ -साथ सरकार द्वारा चल रही वर्तमान योजनाओं व संगठनों का विवरण वाली पुस्तकें अधिक उपलब्ध रहती है उन्हें राजकीय पुस्तकालय कहते हैं हमारे देश का सबसे बड़ा कोलकाता का राष्ट्रीय पुस्तकालय है इसे देश का सबसे बड़ा राजकीय पुस्तकालय कहते हैं जहां पर दस  लाख से भी अधिक पुस्तकों का संग्रह हैI 

 अगर जिंदगी में विकास और हमेशा सकारात्मक विचारों से घिरे रहना  हो या कभी भी किसी भी समस्या का हल निकालना हो तो हमें पुस्तकालय में उन समस्याओं का हल के साथ- साथ ज्ञान का विस्तार और सक्रियता  दिमाग में  पुस्तकालय काफी सहायक होती है I आज के तकनीकी उपकरणों और विज्ञान के क्रांति में भी पुस्तकालय का महत्व कभी नहीं भुलाया जा सकता I  

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