Sunday, February 10, 2019

Essay in hindi on मेला | Fair Festival पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

                         
एक वैसे स्थान जहां काफी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं या वह स्थान जहां विभिन्न प्रकार की दुकाने जो किसी उद्देश्य अथवा पर्व के अवसर पर एक ही जगह सजाई जाती है उन्हें मेला कहते हैं I मेला का अर्थ है विविधता से भरी रंग- बिरंगी चूड़ियां व  स्वादिष्ट से भरपूर मिठाइयां , आकर्षक खिलौने आदि के साथ -साथ झूले- चरखे  आदि  एक ही जगह एकत्रित होते हैं मेला शहरों से ज्यादा गांव में काफी आकर्षक व उत्साह देखने को मिलती है क्योंकि शहर में संसाधनों की आपूर्ति व हर तरह के दुकानें प्रतिदिन सजी  रहती है परंतु गांव में इसके विपरीत वैसे मौके पर मेला का आयोजन होता है जब कोई पर्व  या किसी महात्मा व साधु- संतों के जन्म या पुण्यतिथि हो I मेरे गांव में दशहरा के अवसर पर मेला का आयोजन होता है जिसमें हर वर्ग के लोग व हर उम्र के लोग आस-पास के क्षेत्रों  के व्यवसायी व ग्रामीण लोग सभी शामिल होते हैंI यह मेला दशहरा  के तत्वधान में हमेशा दुर्गा मंदिर के समीप लगाया जाता है उस समय हमारी गांव की भव्यता व चर्चा पूरे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा होती है ग्रामीणों के संपूर्ण प्रयास से हमेशा दशहरे के दिन आकर्षक मूर्तियां  व सुंदर सजावट ना केवल मंदिर के प्रांगण में देखने को मिलती है बल्कि नवरात्र के नौ दिन पूरी गांव रौशनी  से जगमग रहती है परंतु मेले का आयोजन दशहरा के जिस दिन रावण जलाया जाता है उस दिन होता है I
हमारे यहां का रावण दहन पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हैI  जो भी दूर - नजदीक से आए लोग सर्वप्रथम मंदिर में देवी- देवताओं के दर्शन करते हैं उसके पश्चात हाई स्कूल के मैदान में जहां रावण का दहन होता है वहां वृताकार में खड़े होकर  सभी लोग रावण दहन का साक्षी बनते हैंI  उसी दौरान तरह-तरह की मिठाइयां व  व्यंजनों का लुफ्त उठाते हैं ,बच्चों को खिलौने व विशेष रूप से उनके लिए  रेल, हेलीकॉप्टर आदि वाले झूले लगाए जाते हैं जो काफी आकर्षण का केंद्र रहता हैI  मेले के दिन काफी ऊर्जा व उत्साह  के साथ -साथ जगह- जगह पर शोरगुल, भक्ति गानों, गीतों से ना केवल गांव बल्कि पूरा क्षेत्र में ही चहल -पहल रहता हैI  जो अन्य दिन कभी देखने को नहीं मिलती नए -नए कपड़े पहन कर दुकानों में जरूरत के अनुसार लोग खरीदारी करते हैं बच्चे ,औरतें, पुरुषों एक जगह एकत्रित होकर अपनी पसंदिदानुसार व्यंजनों व अन्य  चीजों का लुफ्त उठाते हैंI

  मेले में जादूगर भी काफी दर्शकों को आकर्षित करता है लोग जादू देखने के लिए जादूगर के बनाए हुए  तंबू में जाकर टिकट खरीदकर उनकी कला को देख कर काफी हैरतअंगेज व  आश्चर्यचकित होते हैं वह कभी फूलों का पैसे में तब्दील कर देता  तो कभी खुद अदृश्य हो कर दर्शकों की भीड़ में शामिल हो जाता  जादूगर के ऐसी कला को देख सभी लोग मंत्रमुग्ध हो जाते हैंI  मेला न केवल मनोरंजन व व्यवसायियों के लिए रोजी -रोटी देने का काम करती है बल्कि यह भी दर्शाता है कि लोग आपस में कितने सौहार्द -शांति से एक दूसरे को सहायता करके अपने जीवन को खुशहाल बनाते हैं I मेले में दो  लंबी कतार दुकानों की लगी रहती है, जिनमें अनेक प्रकार के दुकाने ,व्यंजनों व आभूषणों श्रृंगारों  के वस्तुओं के साथ -साथ घरेलू उपयोग में इस्तेमाल करने वाले वस्तुएं भी देखने को मिलती हैI

  मेला शहर में भी लगता है परंतु शहर के मेले में गांव की जैसी मेलों की खुशबू व उत्साह के  मुकाबले में थोड़ी फीकी नजर आती हैI  शहर में मेले से अधिक प्रदर्शनी चाहे पुस्तक की हो या किसी भी उद्योग की वस्तुओं का अधिक आकर्षक होता है परंतु गांव में मेला के करीब दस  दिन पहले से ही बच्चे, बूढ़े, नौजवान,औरतें, पुरुषों सभी के चेहरे पर मेले के नाम से मुस्कान झलकती हैI बचपन के वो दिन मैं कभी नहीं भूल सकता जब विद्यालय में भी अध्यापकों की अनुपस्थिति में हम दोस्तों में मेले व वहां की भव्यता की चर्चा  एक दूसरे से करते थे।ऐसा लगता कि शायद यह विशेष दिन मेला ना बनकर प्रतिदिन हमारे गांव में  ऐसे ही चार -चाँद लगाताI  मेला न सिर्फ  मनोरंजन व घूमने-फिरने आदि चीजों का साधन है बल्कि यहां नैतिकता व एकता का एक बढ़िया संगम देखने को मिलता है I 

बुजुर्गों द्वारा  विशेष रूप से बरगद के पेड़ के नीचे बैठकी व उनके आदेशानुसार मंदिर, गांव के  साथ- साथ दुकानों की सजावट व साफ सफाई आदि का प्रबंध की जिम्मेदारी युवकों व बच्चों को दी जाती ,जो नि:स्वार्थ रूप से लोग बड़े बुजुर्गों के आज्ञा का पालन करते हैंI  जब भी मेला आता है तो वही बचपन की यादें ना केवल ताजा होता है बल्कि यह भी सिखाता है कि कोई भी कार्य अगर हम किसी जात ,धर्म ,गरीबी, अमीरी के भेदभाव को छोड़कर एक- साथ किसी भी पहल को आपसी मेलजोल प्रेम से करें तो वह स्मरणीय बन जाता है मेला इसी स्मरणीय का एक  प्रतीक हैI  

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