Wednesday, February 27, 2019

Essay in hindi on जनसंख्या का दुष्प्रभाव | Effect of Population पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

आज के दौर में जनसंख्या बेरोजगारी ,गरीबी व मानव त्रासदी का प्रमुख कारण हैI  जनसंख्या विस्फोटक पदार्थों से भी अधिक जानलेवा और परेशानियों का प्रमुख वजह भारत में  बना हुआ हैI  वैसे तो पूरे विश्व में जनसंख्या लगतार  बढ़ने से मुख्य समस्या बना हुआ है परंतु विशेषकर हमारे देश में आर्थिक रूप से कमजोर करने में बढ़ती जनसंख्या का बहुत बड़ा हाथ हैI  देश 1947 में आजाद हुआ था तब से हम लोग ढेर सारी समस्याओं  का सामना  कर रहे हैं उनमें से सबसे खतरनाक व विशाल समस्या है जनसंख्या का तेजी से बढ़ना लगभग दस से बारह लाख  औसतन प्रतिवर्ष जनसंख्या में इजाफा होता है, जिसके कारण आग की तरह यह तेजी से ना सिर्फ़ मनुष्य के घर वह स्थानों को अतिक्रमण कर वंचित हो रहे हैं बल्कि जानवरों के लिए भी जंगल धीरे- धीरे मनुष्य के रहने का स्थान में बदल कर जंगल से गांव कस्बों में तब्दील हो गईI 
एक वार्षिक आंकड़ों के तहत आजादी के बाद 1951 में हमारी देश की जनसंख्या 36 करोड़ थी और वर्तमान में बढ़कर 130 करोड़ से भी ऊपर हो चुकी है जिससे आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रतिवर्ष जनसंख्या कितनी तेजी से बढ़ रही है करीब 5 करोड से अधिक लोग प्रतिदिन दो वक्त की रोटी के लिए वंचित रह जाते हैं I लाखों लोग भोजन के अभाव में और स्वच्छ पानी के अभाव में गंदे विषैले खाद्य पदार्थ खाकर रोग से और भूखे मरते हैं ,करोड़ों के पास रहने के लिए घर नहीं हैI  सभी जगह अनियंत्रित भीड़ के कारण लोग सड़क किनारे फुटपाथ पर रहने को विवश है छोटे से बड़े शहरों  मे जाम की समस्या से रोगी इलाज से वञ्चित रहकर
  दम तोड़ देता है ,ठंड ,गर्मी सभी ऋतु में  भी गरीब , जरूरतमंद लोग संघर्षरत जिंदगी खुले आसमान के बीच ऐसे ही  गुजारते हैं क्योंकि उनकी यह मजबूरी है कि दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें भगवान के प्रार्थना के साथ -साथ दूसरे लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है I  

आज जनसंख्या वृद्धि का प्रभाव इतना है कि आम आदमी हमेशा चिंता ग्रस्त रहता है की कल ठीक से दो वक्त का रोटी का इंतजाम हो पाएगा या नहीं क्योंकि बढ़ती जनसंख्या के कारण शिक्षित होने पर भी सीमित मात्रा में नौकरियां रहने से शिक्षित बेरोजगारी बढ़ गई है I अगर हमारे देश में पर्याप्त मात्रा में नौकरियां होती तो बढ़ती जनसंख्या इतनी बड़ी समस्या नहीं बनती ,पर्याप्त मात्रा में निवास स्थान विद्यालयों और चिकित्सा की पहुंच होती तो आज आजादी के करीब 70 साल बाद भी अनाजों की कीमतें इतनी ऊंचाई नहीं छुति ,आज लगभग हर  पदार्थों की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है जिससे एक आम आदमी सामान्य रूप से खुशी पूर्वक जिंदगी बिताने  के लिए भी संघर्ष कर रहा होता हैI  जीवन प्रिय हो गया है श्रमिकों को उचित परिश्रमिक ना मिलने के कारण श्रमिक आंदोलन हो रहे हैं, मिल मालिकों को सही मायनों में इजाफा ना होने के कारण कारखानों में ताला जड़ा जा रहा है जिसके कारण हमेशा मालिक और मजदूरों के बीच मतभेद व झगड़ा होता रहता है इस सभी के मुख्य वजह है बढ़ती जनसंख्याI  हमें  इसके लिए गंभीर रूप से विचार करना होगा और अपने कर्तव्य वह विचारधारा में सभी लोगों को जागरूक कर  जनसंख्या समस्याओं के बारे में बताना होगाI  इसकि शुरुआत खुद से ही करनी चाहिए ताकि आने वाले दिनों में अपने परिवार के भविष्य की रणनीति के तौर पर सुख- समृद्धि खुशियां दे सकेI  आज के जमाने में बड़ा परिवार होना एक अभिशाप है क्योंकि उन्हें किसी भी क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में शिक्षा,चिकित्सा, नौकरी आदि से वंचित रह सकते हैं जिससे विकास तो दूर सामान्य जिंदगी भी नसीब नहीं होगाI  

आज महंगाई के दौर में कोई भी ख्वाब सजने से पहले ही  टूट जाती है हमें बच्चों की जनसंख्या बढ़ाने से ज्यादा महत्व इस पर देना चाहिए कि हम कैसे अपने बच्चों को उनके उचित अधिकार सही ढंग से जैसे शिक्षा, चिकित्सा, भोजन आदि प्रदान कर सकेंI  जहां उन्हें प्यार और देखभाल करने का भरपूर समय दे सकें अगर परिवार छोटा होगा तो हम अपने बच्चों को लालन- पोषण सही तरिके से  कर सकते हैं इसलिए यह सभी शिक्षित व बुद्धिजीवी वर्गों का कर्तव्य है कि शिक्षा का अलख उन सभी लोगों में जगाए जो जनसंख्या के दुष्प्रभाव को नहीं समझते ताकि भविष्य कठिनाइयों का सामना न करने पड़ेI 
               बहुत सारे ऐसे विधियां और तरीके हैं जिसे अपनाने पर परिवार नियोजन, जनसंख्या पर नियंत्रण सही मायने में कर सकते हैं जैसे कि हमें एक पवित्र जीवन का नेतृत्व करना चाहिए, हमें नसबंदी, गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन करना चाहिएI  समान्यत: पुरुष वर्गों में देखा जाता है कि  नसबंदी को लेकर उनमें काफी हिचकिचाहट रहती है वह सोचते हैं कि नसबंदी करने से पुरुषार्थ का प्रतीक धूमिल हो जाएगा ऐसा इसलिए होता है कि उन्हें सही और उचित रूप से ज्ञान का अभाव हैI  इसलिए हर शिक्षित लोगों का कर्तव्य है कि खुद सचेत होने के साथ-साथ लोगों को जागरूक कर इन समस्याओं का हल निकालने में मदद करें सभी लोगों को अगर मालूम चल जाए कि परिवार नियोजन कितना महत्वपूर्ण है तो लोगों में इन प्रकार की विधियों वह तरीके अपनाने में कोई हिचकिचाहट नहीं पड़ेगीI  हमारा सरकार लोगों को इस सन्दर्भ में हमेशा से जागरूक करते आई है चाहे वह विज्ञापनों व शिक्षा के साथ- साथ अस्पतालों व सार्वनिक स्थ्लो पर “हम दो हमारे दो” का नारा से बढ़ती जनसंख्या का महत्व समझाया गया हैI  विगत वर्ष में भी सरकार द्वारा इस बात पर अधिक जोर दिया जाता था कि हमारे सीमित संसाधनों के साथ हमें अवश्य जागरूक और अश्व्स्त हो जाना चाहिए कि प्रत्येक घर परिवारों कि यह कर्तव्य है कि बच्चे कम हो परंतु उनके लालण-पोषण सही मायने में हो उनका अधिकार शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार प्रदान किए जाने में मदद की जाए , फिर भी सरकार को चीन जैसे देशों से सीख ले कर एक कड़ी कानूनी बनाए जाने की आवश्यकता हैI  यह सभी नागरिकों का भी कर्तव्य है कि अगर देश में सुख -समृद्धि और विकास के पथ पर निरंतर आगे चाहते हैं तो जनसंख्या के दुष्प्रभाव को समझना और समझाना होगा जिससे भविष्य में किसी भी तरीके के संकट व समस्याओं से बचने में हमारा देश खुद से ही सक्षम होI 

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