Thursday, January 3, 2019

Essay on पिकनिक Picnic for School Students पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh


मेरा दिसंबर सबसे प्रिय महीना है ,जब भी यह दस्तक देता है सर्दियों के साथ साथ शीतलता वाली रातें मौसम को और ही आकर्षक बनाता है स्कूलों की छुट्टियों में इजाफा हमारे लिए एक नए अवसर के रूप में होता क्योंकि प्रतिदिन हम  एक ही कार्य करते हैं जैसे कि पढ़ना- लिखना, स्कूल और कोचिंग जाना एक हि कार्य जो प्रतिदिन हो साधारण और नीरस बना देता है और विद्यार्थियों के लिए तो समय की पाबंदी और अनुशासन के साथ साथ कुछ ना कुछ नया सीखना, पढ़ना लिखना,जिंदगी ऐसे ही चलती है परंतु दिसंबर जब भी दस्तक देती है हमारे लिए एक अलग ही खुशी और सुकून लेकर आती है I क्योंकि क्योंकि क्रिसमस का त्योहार त्यौहार के साथ साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन जिसमें विद्यार्थियों के साथ- साथ शिक्षकों उत्साहपूर्ण तरीके  तरीके से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते उस दिन हमारे लिए सांता क्लॉज़ द्वारा मिलने वाली उपहारें जो और ही खास बना देता है और उसके साथ ही प्रारंभ हो जाती है नव वर्ष की तैयारियां ,हमारे लिए नए साल की पहली तारीख ख़ास पर्व से भी ज्यादा मायने रखता है क्योंकि सबसे खास होता है हमारे लिए पिकनिक जिसके नाम सुनते ही मन उत्साह ऊर्जा से भर जाती है.


   पिकनिक दरअसल अपने आप में ही विशेष मायने रखता है इसका अर्थ होता है एक ऐसे स्थानों पर घूमने के साथ-साथ समय व्यतीत करना जहां प्राकृतिक सौंदर्य और तारो ताजा वातवरण से परिपूर्ण जगह जहां पर जहां पर एक साथ समूह में भोजन और मनोरंजन आदि करना होता है ,कभी-कभी  परीक्षाओं के बाद स्कूल की तरफ से पिकनिक का आयोजन होता है जिसमें सारे विद्यार्थियों के साथ- साथ शिक्षकगण भी उपस्थित होते हैं छात्रों से भरी बस शहर से थोड़ी दूर एक ऐसे पार्क या झील के लिए रवाना होता है जहां खूबसूरत वादियां और ऐतिहासिक स्ठल सुंदर दृश्य के साथ सुंदर दृश्य के साथ अपने आप  अपने आप में ही एक इतिहास समेटे रहता है जहां मनोरंजन के साथ-साथ नई चीजें को अध्ययन करने की मौका मौका मिलता है



 परंतु  पहली तारीख की जो पिकनिक परिवार के साथ मनता है  वो काफी ख़ास होता है सभी लोग सभी लोग कड़वी यादों को भूलकर अपने छोटी बड़ी खुशियों को समेट कर नव वर्ष में प्रवेश करने की बेसब्री से इंतजार करते हैं हमें अभी तक याद है जब हम बच्चे थे तो हमारे लिए पिकनिक किसी किसी  तोहफे से कम नहीं था क्योंकि साल की अंतिम दिन कोई भी बच्चे सोते नहीं थे और पूर्वानुमान लगाते कि इस बार हम लोगो को दादाजी कहां मले जाने वाले हैं उस दिन पहली तारीख जैसे ही सुबह उठते ससर्वप्रथम स्नान कर दादा जी के साथ  पूरी परिवार मंदिर को जाते और वहां पर पूजा -अर्चना में सब की दुआ यही होती है कि इस साल विगत साल से भी ज्यादा खुशियां लेकर आए सभी लोगों को प्रणाम कर किसी भी तरीके से मनमुटाव को हटाकर सभी दोस्तों एवं परिचितों से मिलते हैं उसके बाद बस हमारी इंतजार करती है जिसे चाचा जी खुद ड्राइव करके ले जाते हैं सभी लोग बस में बैठने से पहले अपना मनपसंद चीजें एवं संगीत के लिए टेप रिकॉर्डर के साथ- साथ दादा जी का रेडियो लेना नहीं भूलते  और उसके बाद सभी सदस्यों एक साथ भजन कीर्तन और फिल्मी गीत गाना के साथ दादा जी के बताए हुए नियोजित झील के किनारे प्रकृति की गोद में शुद्ध वातावरण और मनोरम दृश्य के पास जा पहुंचे जहां काफी भीड़ लगी रहती है वहां अपनी -अपनी जगह चूनने की होड़ लगी रहती सभी लोग अपना चादर चादर बिछाकर बैठे वहां पहुंचते ही सभी लोगों को ही भूख लग जाति है क्योंकि तरोताजा हवा के बीच स्वादिष्ट व्यंजनों की खुशबू से मुंह में पानी आने लगती इधर मम्मी चाची जी और बुआ जी भी भोजन तैयार कर जब बहुत ही विशेष और स्वादिष्ट होते हैंI पिकनिक का जिस दिन आयोजन होता है

उस दिन सभी पार्कों  एवं पर्यटन स्थलों की सजावट और प्रदर्शनी देखते ही मन में रोमांच पैदा करता हैI पिकनिक के दिन मनोरंजन के साथ-साथ, मन को ऊर्जावान और संतुष्टि प्रदान होता है, पिकनिक आज के तकनीकी दौर में भी बहुत ही अलग अमिट छाप छोड़ता हैI हम कितने भी मोबाइल,इंटरनेट ,सिनेमा का लुफ्त उठायें मगर उतनी ख़ुशी और ताजगी का महसूस नहीं होता है,पिकनिक जैसी स्वादिष्ट व्यंजन रेस्टोरेंट में नहीं प्राप्त होती है ,पिकनिक हमे बड़े और छोटों के साथ क्रियाकलाप के साथ -साथ सांमजस्य बनाने का अवसर प्रदान करता है जिससे हमे नैतिकता और सवेंदनशीलता के बौद्धिक विकास होता है , इसीलिए पिकनिक हर उम्र के वर्गों के लिए अहम भूमिका अदा करता हैI

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