Tuesday, January 15, 2019

Essay in hindi on विद्यार्थी एवं परीक्षा | Student & Examination पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

                    
परीक्षा हमेशा विद्यार्थियों के मन में भय पैदा करती है ,चाहे वे मेघावी छात्र हों या औसत मगर सभी लोग के मन में एक ही अभिलाषा जागृत होती है कि किसी भी तरीके से परीक्षा के परिणाम बढ़िया आये या दूसरे शब्दों में यह कहे कि विद्यार्थियों के लिए एक जांच है परीक्षा, जो उनके परिपक्वता और आत्मविश्वास को जोड़ता है, जिससे खुद की कमियां, त्रुटियों का आकलन कर  निरंतर सुधार करते हैं I जैसे-जैसे परीक्षाएं नजदीक आने लगती है वैसे -वैसे विद्यार्थियों की मेहनत और अधिक हो जाती है उनको हमेशा डर परीक्षा की सताती है वर्तमान में भी जाकर भविष्य के बारे में सोचने लगते हैं ,जिससे उनका वर्तमान भी काफी प्रभावित होने लगता है
ऐसे विद्यार्थियों को चाहिए कि प्रतिदिन हर विषय में निरंतर अभ्यास करें अगर हम वर्तमान में नियमित अध्ययन करें तो परीक्षा के भय से  काफी हद तक बचा जा  सकता है, परीक्षा एक लॉटरी की तरह होती है जो अनिश्चित है, कि किस पाठ से कितने प्रश्न पूछे जा सकते हैं इसलिए विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है निरंतर मेहनत के साथ -साथ पूर्ण अभ्यास करनाI परीक्षा का अर्थ होता है विद्यार्थियों के योग्यता जानना उसके अनुसार ही छात्रों को सफल या असफल घोषित किया जाता हैI  परीक्षाएं तीन प्रकार की होती है मौखिक,लिखित और प्रायोगिकI प्राथमिक कक्षा के छात्रों में केवल मौखिक और लिखित परीक्षा होता है, उच्च वर्ग के छात्रों में मौखिक, लिखित और प्रायोगिक परीक्षाएं तीनों ही होती हैI  

 प्रायोगिक परीक्षा मुख्यतः विज्ञान और कला संगीत आदि में होता है ,परीक्षा छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है इससे हमें अपने आप की त्रुटियां और कमियों को दूर कर निखार करने में मदद मिलती है I  परीक्षा के थोड़ा सा दबाव रहना भी आवश्यक है, क्योंकि यह विद्यार्थियों को  कड़ी मेहनत और पूर्ण अभ्यास हर पाठ को पढ़ने- लिखने और याद करने को विवश करता है, जिससे हमारे प्रदर्शन में हमेशा सुधार हो और हम अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित कर सकेI विद्यार्थी जीवन उम्र का सर्वश्रेष्ठ जीवन है चरित्र और स्वभाव का निर्धारण होता है, इसलिए विद्यार्थियों का कर्तव्य है कि भौतिक सुख -सुविधाओं को त्याग कर  हर विषय में रुचि के साथ पढ़ाई करें जिससे खुद के विकास के साथ-साथ देश के प्रगति में योगदान देंI  विद्यार्थी परीक्षाओं के समय और अधिक लग्न के साथ पढ़ाई करते हैं ,परीक्षा के परिणाम से अभिभावक भी अपने बच्चों को प्रगति मानसिक क्षमता को जानते हैं ,परंतु परीक्षा में कुछ  खामियां भी है यह बच्चों के ज्ञान की पूरी रूप से सत्यता कि जांच नहीं होतीI  परीक्षा में सफल होना एक कला मात्र है I 

 यह जरूरी नहीं कि जो परीक्षा में कम अंक लाए या दूसरे शब्दों में यह कहे की सबसे अधिक अंक वाला विद्यार्थी सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि विद्यार्थी हमेशा विषय संबंधित सिलेबस अनुसार को पूरी तरह से तैयारी करते हैं वह वही प्रश्न को अध्ययन करते हैं जिसे शिक्षक द्वारा सुझाव दी जाती है जिससे उनकी जानकारियों में कमी रह जाती है कुछ विद्यार्थी समझने के बजाय उसे रटने लग जाते हैं, जो उनकी दिनचर्या में शामिल हो जाता है और उन्हें लिखित याद होने पर भी प्रायोगिक परीक्षा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और उनकी ज्ञान सीमित होने लगती है ,इसलिए विद्यार्थियों की जरूरी है कि प्रश्न को अपने अनुसार समझ कर अपनी ही भाषा में उत्तर देंI उस तथ्य को समझें क्योंकि पढ़ाई हमें केवल परीक्षा में उच्च या निम्न अंक के लिए नहीं बल्कि भविष्य में  मानवीय कार्य ,हमारे द्वारा देश के हित में ,परिवार के हित में शिष्टता संबंधी ,विनम्रता और संवेदनशीलता को दर्शाता है आजकल सफलता पाने के लिए विद्यार्थी कम समय में ही हर कुछ पाना चाहते हैं जो उनको अशिष्ट कार्य की ओर ढकेलता है और वो इम्तिहान में केवल अंक मात्र के लिए और शिक्षक ,अभिभावक से मिले प्रोत्साहन के लिए नकल करने लगे हैं जिससे उनकी समाज में नकारात्मक छवि बन जाती है I इस प्रकार के विद्यार्थी को समाज कभी स्वीकार नहीं करती ,विद्यार्थियों को समाज में अनुशासित, ईमानदार ,कर्तव्यनिष्ठ और संवेदनशील माना जाता है, इसलिए हमें परीक्षा हमेशा उचित तरीके से देना चाहिए I परीक्षा के प्रश्न ऐसे तैयार हो जो पूरी पाठ्यक्रम से हो उसके साथ- साथ सामान्य ज्ञान के प्रश्न भी पूछे जाने चाहिए, जिससे उनको ज्ञान बढ़ने के साथ-साथ नकलची  और रटने  वाले विद्यार्थियों में कमी आएगी कुछ अंक विद्यार्थियों को उनके व्यवहार उनके कक्षा में नियमित नैतिक प्रदर्शन और अनुशासन के लिए भी जोड़ा जाए ताकि विद्यार्थी अपने आप को हमेशा  सक्रियता बरकरार रखेंI  

No comments:

Post a Comment