Thursday, January 10, 2019

Essay in hindi on सरस्वती पूजा | Saraswati puja पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

                       
 सरस्वती पूजा माघ महीने में शुक्ल पक्ष के वसंतपंचमी के दिन मनाई जाती है, सरस्वती मां को विद्या एवं बुद्धि की परम देवी माना गया है, माता सरस्वती के कृपा से मानव एवं जीव -जंतुओं को वाणी प्राप्त हुआIसरस्वती पूजा विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय हैIस्कूलों,कॉलेजों तथा हर शिक्षण संस्थानों में हर वैसी जगह जहां गीत- संगीत,नृत्य आदि जैसे कला का गुर सिखाया जाता है, बड़े ही धूम-धाम से यह उत्सव  मनाया जाता हैIमां सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना जाता है, उनका सवारी हंस है,उनका आसन कमल जो सादगी और स्वच्छता का प्रतीक है I मां सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं  जो की सादगी का प्रतीक है, जिससे यह शिक्षा मिलती है कि विद्या ग्रहण करने वालों को आकर्षक एवं कीमती वस्तुओं का धारण नहीं करना चाहिए ,मां सरस्वती की चार भुजाएं हैं उनकी एक हाथ में वीणा जो संगीत का ज्ञान आवश्यक माना गया है ,गीत एवं संगीत को भक्ति एवं आध्यात्मिक रूप से काफी अहम माना गया है ,दूसरे हाथ में पुस्तक जो ज्ञान का शिक्षा देती है और एक हाथ वरमुद्रा  में और एक हाथ पुष्पमाला से सुसज्जित  हैI  पुराण  एवं शास्त्र के अनुसार वसंत पंचमी अर्थात सरस्वती पूजा के अलग-अलग ढंग से  चित्रण और सुनने को मिलता हैI मां सरस्वती का इसी दिन जन्म हुआ था इसलिए उनके जन्म दिवस के रूप में भी भी यह पर्व मानाया जाता हैI  मां सरस्वती को भगवती शारदा,वीणा- पानी, वागेश्वरी और वाग्देवी के नामों से भी जाना जाता है, सरस्वती पूजा के तैयारियां कुछ दिन पहले से ही  शुरू हो जाती है पूरे उत्साह एवं उमंग के साथ मोहल्ले ,कस्बों तथा गाँवों   में चंदा जमा करते हैं और पूजा के अवसर पर मां सरस्वती के सुंदर मूर्तियां सजावट व सुंदर वस्त्रों से सजा कर उनकी आराधना करते हैंI इस दिन स्त्रियां पीले रंग का वस्त्र धारण करती हैं
,सरस्वती पूजन का विधान पौराणिक काल से ही चला आ रहा है, इस दिन अत्यंत  शुभ मुहूर्त मानने के पीछे अनेक कारण हैI  माघ मास का धार्मिक, अध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है| माघ मास में पवित्र तीर्थों में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है|  सरस्वती मां का वेदों में  वर्णित किया गया है जो इस प्रकार है मां सरस्वती शीतल चंद्रमा के किरणों से गिरती हुई ओस की बूंदों की  श्वेत धार से सुसज्जित हैI इनका वंदना भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी करते हैंI 

 सरस्वती मां का शांत वातावरण में मन को निर्मल बनाकर पूरी  निष्ठा से मां सरस्वती की पूजन करते हैंI वसंत पंचमी शुरू होते ही खेतों में सरसों का चमकना फसलों की बलिया  खिलते हुए  दिखना बहुत ही  भव्य नजारा को प्रदर्शित करता है, आम के वृक्षों पर मंजर और कोयल की मधुर आवाज में गीत गाना तो इस ऋतु को प्राकृतिक रूप से भी और आकर्षक बना देता हैI  इस दिन विद्या एवं ज्ञान के साथ-साथ हुनर तथा  कला में अव्वल  होने की आशीर्वाद मांगते हैं , कलाकारों चाहे लेखक, गायक, कवि, अभिनेता या  किसी अन्य कला से संबंधित हर लोग अपने उपकरणों के साथ मां सरस्वती का पूजा वंदन करते हैं, इस दिन विशेषकर छात्रों में एक अलग ही उत्साह एवं उमंग देखने को मिलती है ,दूसरे दिन प्रतिमा का विसर्जन होता है सभी लोग आपसी भेदभाव को भूल पूरी तरह से अध्यात्मिक रंग  में रंग जाते हैं Iइस दिन लोग अबीर- गुलाल व कुमकुम एक दूसरे को लगाते हैंI मां सरस्वती की पूजा केवल भारत में ही नहीं नेपाल तथा अन्य हिन्दू आबादी वाले देशों में भी बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता हैI उस दिन हम सभी मन, कर्म और वचन से मां सरस्वती के चरणों में अपने आपको सौंप  कर अच्छे विचार और ज्ञान पाने की प्रार्थना करते हैं ,परंतु आज के आधुनिक दौर में सरस्वती पूजा के नाम पर कहीं-कहीं अनुचित तथा अनैतिक कार्य भी होते हैं ,मां सरस्वती के प्रतिमा के समीप ही भद्दे और फिल्मी गाने का प्रचलन बढ़ने से नाटक में फूहड़ता  गंदे संगीत एवं अश्लील नाच दिखाए जाने से पूजा की सारी पवित्रता नष्ट हो जाती है और हमारे सभ्यता को भी बड़े ही चोट पहुंचती हैI 

दूसरे देश से आए  पर्यटकों ,सैलानियों की दृष्टि में हम असभ्य  सिद्ध हो जाते हैंI छात्रों को हमेशा इस प्रकार के  असभ्य एवं अनुचित कार्यों से बचकर सच्चे दिल से मां सरस्वती की आराधना करनी चाहिएI मां सरस्वती सच्ची विद्या का शिक्षा देती हैं  स्वयं से ही हम प्रतिज्ञा लेते हैं कि पढ़- लिखकर हम अपने ऊर्जा और ज्ञान को देश हित के कार्यों  में लगाएंगे जिससे अपने परिवार और देश का नाम पूरे विश्व में ऊंचा करेंगे इसलिए सरस्वती पूजा का महत्व विद्यार्थियों के लिए सबसे खास होता हैI 
विद्या, बुद्धि का परम देवी मां सरस्वती हैं,  माघ महीने के शुक्ल पक्ष की वसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती पूजन का विधान पौराणिक काल से चला आ रहा हैI वसंत पंचमी को हमारे पुराणों में भी बड़ा अत्यंत शुभ माना गया है ,वसंत पंचमी को अत्यंत शुभ  शुभकर  मानने के पीछे बहुत सारे कारण हैI  वसंत पंचमी के दिन ही देवी सरस्वती मां पृथ्वी पर प्रकट हुई थी इस प्रकार से उस दिन उनकी जन्म दिवस मनाया जाता है, मां सरस्वती की चार भुजाएं हैं उनकी एक हाथ में वीणा है जो कि विद्या के साथ संगीत व कला का ज्ञान आवश्यक माना जाता है संगीत भक्ति एवं आध्यात्मिक रूप से काफी अहम माना गया है उनके दूसरे हाथ में पुस्तक जो ज्ञान व  शिक्षा का प्रतीक है,अन्य हाथ वरमुद्रा में और मालाएं हैI सृष्टि की रचना के बाद सृष्टि की रचना के बाद मां सरस्वती नहीं मनुष्य मनुष्य मनुष्यों एवं तमाम जीव जंतु कोई वाणिज्य थी वाणी दी थी सरस्वती पूजा विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय है यह स्कूलों कॉलेजों तथा हर शिक्षण संस्थानों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है मां सरस्वती की विद्या एवं ज्ञान की देवी माना जाता है उनका सवारी हंस है व आसन कमल है जो सादगी व स्वच्छता का प्रतीक है मां सरस्वती का वस्त्र श्वेत है जिससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि विद्या ग्रहण करने वाले को आकर्षक एवं कीमती वस्त्रों का धारण नहीं करना चाहिए मां सरस्वती हमें मन कर्म किस्सा इमानदारी पूर्वक विद्या ग्रहण करने की सीख देती है अपने मन के सारे गंदे विचार को त्याग कर सुयोग विचार ग्रहण करने की प्रेरणा देती है सरस्वती पूजा के कुछ दिन पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती है पूरे उत्साह हर्षोल्लास से मुहल्ले कस्बे एवं गांव में चंदा जमा करते हैं एवं पूजा के दिन उनकी सुंदर प्रतिमा के साथ पूजा करते हैं बसंत पंचमी को शरीक सभी कार्यों के लिए सभी शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है चाहे वह नवीन विद्या ग्रहण करना हो या गृह प्रवेश करना हो गृह प्रवेश का मुहूर्त हो या यह विवाह का मुहूर्त हो काफी शुभ माना गया है माघ मास के अंदर या त्यौहार आता है य त्यौहार आता है माघ मास में माघ मास का अपना एक धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व है इस मास में पवित्र तीर्थों का पवित्र तीर्थों में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है सूर्यदेव भी उत्तरायण हो चुके होते हैं आता इस पर्व का अतः इस पर्व का स्वता ही स्वता ही अध्यात्मिक धार्मिक वैदिक सभी दृष्टि से बड़ा ही विशेष महत्व दिखता है मां सरस्वती बुद्धि गुजरता को नष्ट करके हमें अच्छी बुद्धि प्रदान करती हैं मां देवी सरस्वती शीतल चंद्रमा के की किरणों से गिरती हुई बांध के श्वेत धार से गिरती हुई ओस की बूंदों की सुविधा से श्वेत धार से से सुसज्जित है सुसज्जित है मां सरस्वती को श्री गायत्री और ब्रह्माणी भी कहा गया है सावित्री गायत्री वह ब्रह्माणी भी कहा गया है सरस्वती पूजा के दिन उनके सुंदर प्रतिमा ऊपर सजावट व फलो मिठाइयों के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं पवित्र वातावरण मेरा कर मेरा कर मन वचन एवं कर्म से पूर्ण निष्ठा के साथ पूर्ण निष्ठा एवं भक्ति के साथमां सरस्वती की पूजा की जाती है इन दिन स्त्रियां पीले रंग का वस्त्र धारण करते हैं खेतों में सरसों के चमकना एवं फसलों की बलिया खेलते देखना अत्यंत मनोरम दृश्य को प्रदर्शित करता है

 आम के वृक्षों पर मंजर और कोयल की मधुर आवाज तो इस ऋतु को रितु को और ही आकर्षक बना देता है पुराणों शास्त्रों में वसंत पंचमी को अलग अलग ढंग से चित्रण देखने व सुनने को मिलता है सरस्वती पूजा के दिन हर कलाकारों जो संगीत के जो कला के किसी भी क्षेत्र में संबंधित रखते हैं सभी लोग अपने उपकरणों के साथ मां सरस्वती का पूजन कर मेहनत एवं कला के मार्ग पर हमेशा श्रेष्ठ प्रदर्शनप्रदर्शन करने का  वर मांगते हैं उस दिन आपसी भेदभाव को भूलकर हम सभी मन कर्म और वचन से मां सरस्वती के चरणों में अपने को सौंप दें और उनसे अच्छे विचार और ज्ञान पाने की प्रार्थना करते हैं पूजा समाप्त होते ही एक दूसरे के साथ प्रसाद पाते हैं इस दिन विद्यार्थियों द्वारा नाटक भी खेले जाते हैं और फिर साथ-साथ संगीत का आयोजन भी होता है और दूसरे दिन उनकी मूर्ति को विसर्जित नदियां या तालाब में की जाती हैं सरस्वती पूजा के दिन छात्रों में एक अलग ही सा उत्साह व अध्यात्मिक रंग देखने को मिलता है परंतु आज के आधुनिक दौर में कहीं-कहीं अनुचित कार्य भी देखदेखने को मिलता है है पूजा के समय माँ सरस्वती के समीप लाउडस्पीकर से भद्दे फिल्मी गाने बसते हैं नाटक में भी गंदे एवं अश्लील नाच दिखा जाते हैं इन सारे कार्यों सेनष्ट हो जाती है पूजा की सारी पवित्रता नष्ट हो जाती है हमारी सभ्यता को बड़ी ही चोट लगती है चोट लगती है और विदेश से आए हुए पर्यटकों सैलानियों के नजर में हम असभ्य सिद्ध हो जाते हैं इसलिए हमें इन बुराइयों से हमेशा बचके रहने की जरूरत है मां सरस्वती की पूजा हमें सच्ची विद्या के साथ साथ अनुशासन वह ज्ञान का प्रकाश देती हैं जिससे हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर अपना देश और परिवार का नाम पूरे विश्व में पूजा करते हैंऊंचा करते हैं   

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