Friday, January 18, 2019

Essay in hindi on मातृभूमि | Motherland पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

             
 मैं अपने मातृभूमि से बहुत प्यार करता हूं, मातृभूमि का आशय यह है कि जो जिस देश या स्थान पर जन्म लेता है वही उसकी जन्मभूमि या मातृभूमि कहलाता है I  मुझे अपने देश के नाम लेते हि  गर्व के साथ समर्पण व अनुशासन की भावना जागृत होती है I दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों में से एक प्राकृतिक सुंदरता व भव्यता के कारण मुझे मेरी मातृभूमि से विशेष  लगाव है और गर्व भी  कि मैं एक भारतीय हूंI मेरा जन्म “भारत” देश में हुआI  इस देश का विशेषता का वर्णन करना  शब्दों में संभव नहीं है I भारत हर क्षेत्रों  में दुनिया के लिए प्रेरणीय  है I सभी लोगों को अभिलाषा  होती है, एक बार हमारी मातृभूमि पर आने का सौभाग्य प्राप्त होI प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति अलग-अलग सभ्यता से भरपूर है हमारा देश ,उसके बावजूद सभी लोग एक ही रंग में रंगे हैंI  संस्कृति भले ही अलग है भाषाएं अलग है ,लेकिन लोगों के मन में एक ही एहसास है भारतीय होने पर गर्वI  हमारे देश को लगभग 3 भागों में विभाजित किया जा सकता है उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र, उपजाऊ मैदान और दक्कन (दक्षिणी)I  उत्तरी क्षेत्र में हिमालय और उसके विभिन्न शाखाओं के लिए जाना जाता है जो हमारे लिए काफी उपयोगी है , कृषि प्रधान देशों में सर्वश्रेष्ठ भारत में फसलें उपजाऊ का प्रमुख कारण हिमालय एवं उनके अन्य शाखाओं से ही  संभव है, जो प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाने के साथ-साथ इनका जलवायु ठंड होने के कारण पर्यटकों को तो  आकर्षित करता ही है, साथ ही साथ प्रमुख नदियां- गंगा, यमुना ,ब्रह्मपुत्र आदि जैसे नदियां यहीं से होकर गुजरती हैI  जिनके बहाव के कारण उपजाऊ मिट्टी खेत में पहुंचती है इसलिए इन्हें भारत के समृद्धि भी बोल  सकते हैं I यहां की जलवायु शुद्ध वातावरण के कारण स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक लाभदायक हैI हिमालय का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट विश्व का सर्वोच्च शिखर भी हैI  यह हमारे अभिवावक के तौर पर भी जाने जाते हैंI 

 गंगा ,यमुना के साथ-साथ सहायक नदियों के लिए विख्यात उपजाऊ मैदान ,इन नदियों  की जलें पर्वतीय क्षेत्रों से आने के कारण कभी नहीं सूखती है Iयहां की जलवायु ना तो ज्यादा गर्म रहती है और ना ही ज्यादा ठंडी, भारत एक कृषि प्रधान होने के साथ-साथ अपने विभिन्न सांस्कृतिक एवं परंपरा के लिए  इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों पर इनका वर्णन अंकित हैI  चाहे वो  भौगोलिक रूप से हो या ऐतिहासिक रूप से ,उपजाऊ मैदान हमारे देश के सबसे खास स्थल के रूप में जाना जाता हैI  पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा उपजाऊ भूमि इसी क्षेत्र में हैI यहां के अधिकांश लोग गांव में रहते हैं I 

दक्कन क्षेत्रों को विन्ध्याचल और सतपुड़ा के श्रृंखला, उत्तर को दक्षिण से अलग करती हैI  इसी कारण से यहां की संस्कृति उत्तरी क्षेत्रों के संस्कृति से कुछ अलग है क्षेत्र में कई नदियां, महानगरें स्थित हैI जो उद्योगों एवं व्यापार के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैI  नर्मदा, ताप्ती, कावेरी ,कृष्णा आदि जैसी प्रमुख नदियां इसी क्षेत्र में बहती है I यहां के प्रमुख नगरों में से त्रिवेंद्रम ,चेन्नई ,मुंबई, नागपुर पुणे ,,बेंगलुरु  हैं I हमारी मातृभूमि क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवां और जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र हैI वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से दोनों ही क्षेत्रों में विश्व में भारत का योगदान अतुलनीय हैI यह देश जितना विद्वानों, ऋषि-मुनियों ,शांति, अहिंसा के लिए विख्यात है उतना ही शौर्य शक्ति के लिए भी ,विश्व की तीसरी बड़ी सैन्य शक्ति है और जब -जब  देश के दुश्मनों ने हमारी शक्ति परीक्षण का चुनौती दिया है तब तक उन्हें युद्ध स्थल में मात खानी पड़ी है I प्राचीन समय में भारत को सोने की चिड़ियाँ  कहा जाता था ,यह व्यापार का प्रमुख केंद्रों में से एक था यहां विश्व के सभी जगहों से व्यापारियों का आवागमन  होता थाI   यहां विद्वानों एवं यात्रियों शोध एवं अध्ययन के लिए आते थे I हमारा देश राजतंत्र शासन में भी न्यायसंगत  के लिए काफी प्रसिद्ध था यहां विदेशी प्रमुख विद्वानों में फाह्यान ,व्हेन स्वांग, वास्कोडिगामा, इब्नबतूता, मेगास्थनीज ,सर टॉमस रो ,अलबरूनी जैसे विद्वान व इतिहासकार भारत में अध्ययन व शोध  करने के लिए आये I  जो भारत के बुद्धिमत्ता, व्यवहार, मेहमान-नवाजी को देख कर काफी आश्चर्यचकित हैI  उन लोगों ने भारत का वर्णन विश्व में सर्वश्रेष्ठ देश के रूप में किया है ,उन्होंने भारतीयों का धनी और विकासशील  होने के साथ-साथ यहां के संतोषजनक भाव एवं वादों के पक्के अध्यात्मिक रूप से  शास्त्र एवं शस्त्र में भी निपुण माना हैI  यहां के लोग अशिष्ट एवं अनैतिक कार्यों से नफरत करते हैंI  सबसे अधिक परिश्रमी भारत को ही माना है

 भारत का आत्मा गांवों में बसती है, पर वर्तमान स्थिति की बात की जाए तो थोड़ा सा परिस्थितियां बदल चुकी है जो संतोषपूर्वक नहीं हैI  बढ़ती जनसंख्या और निम्नस्तरीय  शिक्षा के कारण बेरोजगारी बढ़ गई है I गरीबी ,आंतकवाद यहां का मुख्य चुनौतियां बन गई हैI  परंतु सरकार लगातार सुधार हेतु कोशिश कर रही है I  शिक्षा का अलख  फैलाने एवं गरीबी व बेरोजगारी हटाने के लिए सरकार दृढ़ संकल्प हैI  परंतु यह कोई आसान काम नहीं आर्थिक- उदारीकरण में  भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है, हाल ही में भारतीय मानक मूल्यों के आधार पर विश्व का सबसे बड़ा क्रय विक्रय के आधार पर विश्व का तीसरा सबसे बड़ा अर्थव्यवस्था  बन गई है हमारी मातृभूमि और हम आशा करते हैं कि भविष्य में एक समय जल्दी आएगा जब हमारा मातृभूमी पुन: प्रसिद्ध एवं समृद्ध होगा I  

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