Thursday, January 17, 2019

Essay in Hindi on जीवन का लक्ष्य | for School Students पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

                 
किसी विद्वान ने कहा है कि कर्म ही पूजा है, क्योंकि हम जो भी जिंदगी में करते हैं उसी के अनुसार फल मिलता है I कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति तो कोई घृणित ,अमीर , गरीब ,मध्यमवर्ग आदि जैसे वर्ग में शामिल हो जाते हैंI हमें  जीविका चलाने के लिए हमेशा कार्य करना होता है , जिसके पास धन की कमी नहीं है वह भी आनंदित  मुद्रा में कार्य करते हैंI अगर हम कोई कर्म ही न करें तो,हमारा जीवन जानवर से भी बदतर हो जाएगा, क्योंकि जानवर को भी अपने भोजन के लिए कर्म करना पड़ता हैI मनुष्य की पहचान उनके किए गए कर्मों और लिए गए फैसलों से होता है I परिश्रम और कार्य का मतलब यह नहीं कि हम जीविका चलाने के लिए कोई भी कार्य कर ले जो घृणित हो या जिसमें आपकी कोई रुचि ना हो, बल्कि हमें सही समय पर अपना मनचाहा लक्ष्य  को निश्चय और निर्णय करने की जरूरत है और उसके बाद धैर्य के साथ नियमित कड़ा परिश्रम करके अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है I परंतु कोई भी  निर्णय करने से पहले उसके बारे में जानकारी और ज्ञान होना बहुत ही जरूरी है क्योंकि हमारी मनचाहा लक्ष्य बहुत ही  सपनों की तरह होता हैI 
इसके लिए मेहनत और नियमित अभ्यास करना होता है I  हमारे सही समय पर सही कार्य का मनपसंद चुनाव करें जिसमे भविष्य हमेशा प्रगति की ओर हो I सामान्यत: देखा जाता है की कोई युवा शिक्षित और ज्ञान  होने के बाद भी कभी गलत और अशिष्ट व्यवहार करते हैं जिससे  एक असमाजिक एवं असफल व्यक्ति बन कर रह जाते हैंI  यह उन पर निर्भर करता है कार्य करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी उसका परिणाम जरूर जान लें कौन सा कर्म  भविष्य में उनको प्रगतिशील एवं प्रतिष्ठित बनाएगा I

 कुछ ऐसे व्यक्ति भी हैं जो शिक्षित तो है अपने लक्ष्य को पाने के लिए थोड़े कार्य करते हैं और उसका सही परिणाम ना मिलने पर हताश होकर पूरी तरह छोड़ देतें  हैं जिससे उनके सपने अधूरे रह जाते हैं ,मजबूरी में ऐसे कार्य करते हैं जिनमें उनकी कोई रुचि नहींI  प्राचीन समय में यह कोई गंभीर समस्या नहीं था परंतु आज के आधुनिक दिनों में हमारे युवाओं  तेजी से  डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं Iकुछ शिक्षित युवा कम समय मे अपने अभिलाषाओं को पाने  के लिए अपराध की ओर बढ़ते कदम को देखकर हमारे देश के सबसे गंभीर विषय बन गया है, जिसका दुष्परिणाम सामने आ रहे हैंI  प्राचीन समय में अपने अभिभावक के अनुसार कैरियर चुनने का फैसला युवाओं द्वारा लिया जाता था अगर किसी के पिताजी कोई व्यापार   करते थे तो अधिकांश लोग उसी व्यापार के देखरेख में उनका हाथ बटाते थे और धीरे- धीरे व्यवसाय़ी बन जाते थेI  ऐसे ही अन्य क्षेत्र में भी अधिकांश देखा जाता था मगर आज पूरी तरह से परिस्थितियां बदल चुकी है, युवाओं के सपने साकर करने के लिए उनके अभिभावक भी पूरी तरह से स्वतंत्रता दे चुके हैं और साथ ही साथ उस लक्ष्य  प्राप्ति हेतु समर्थन करते हैं चाहे वह आर्थिक रूप से हो या शारीरिक रूप से I इसलिए युवाओं पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार के लक्ष्य की ओर पाने की ललायित हैं I

  ऐसा जरूरी नहीं कि हमारे साथ रहने वाले  दोस्त का पसन्द किसी क्षेत्र में है और उसमें वह पूरी तरह से सफल और प्रतिष्ठित बन जाता है I यह जरूरी नहीं कि हम भी उसी के बनायानुसार कदम पर चलकर सफल हो जाए, क्योंकि हर व्यक्ति का लक्ष्य और रुचि अलग-अलग क्षेत्रों और विषयों में हैI चाहे वह खेल, विज्ञान, साहित्य , कला  या राजनीति होI  सभी क्षेत्रों में कड़ी मेहनत एवं नियमित अभ्यास ईमानदारी से  करने के साथ-साथ केवल वर्तमान में सोचने से हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैंI  क्योंकि अभिभावको ,सरकारों द्वारा भी उन्हीं को प्रोत्साहित किया जाता है जो किसी क्षेत्र में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके कहने का तथ्य है कि हमें यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए किस क्षेत्र में हम ज्यादा सक्रियता बरतते हैं? किस में हमारी सबसे ज्यादा रुचि है?उसी के अनुसार अपने लक्ष्य चुनना चाहिए क्योंकि रुचि वाले कार्य उस व्यक्ति को निपुण बना सकता हैI  किसी विद्यार्थी को साहित्य एवं लेखन में अधिक ल्गाव होता है पर उसके बावजूद वह विज्ञान का चुनाव करते हैं ,जिनमें उनकी असफलता प्राप्त होती है और वह निराश हो जाते हैंI उसके पश्चात अध्ययन ही करना छोड़ देते हैं जिससे वे एक अच्छे विद्यार्थी होते हुए भी असफल और निम्न स्तर के छात्र बन कर रह जाते हैं I  मेरे चाचा जी एक वकील हैं हमेशा प्रश्न करना सन्देह करना उनकी  दिनचर्या में शामिल है, जो मुझे कतई पसंद नहीं  अपने बारे में अगर यह पूछे कि मैं क्या बनना चाहता हूं मैंने अपने बारे में विचार विमर्श किया है और मुझे कला के क्षेत्र में अधिक रुचि है और दूसरा अन्य नौकरी मे मुझे कोई खास रुचि नहीं, जिससे मैं खुशी- दिल से कुछ योगदान नहीं दे सकता मुझे सरकारी सेवाओं में उच्च पद या निम्न पद पर आसीन्न कर्मचारियों .अधिकारियों या कोई भी हो जो घूस लेते हैं मजबूरियों का फायदा उठाते हैं मैं वह कर नहीं सकताI  यह मेरी अपनी धारणा है आज भारत गुलाम नहीं पर पूरी तरह से भ्रष्टाचार के गिरफ्त में आ गया है मैं ऐसा कार्य नहीं कर सकता जो गलत और असंवैधानिक होI  हर लोगों को लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमेशा ईमानदारीपूर्वक एवं कड़ी मेहनत,धैर्य के साथ प्रयास करना चाहिएI  यह हो सकता है कि हमें सफलता उसमें जल्दी ना मिले मगर एक ना एक दिन सफलता जरूर मिलेगी और अपनी लक्ष्य पर गर्व भी होगा I 

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