Tuesday, January 15, 2019

Essay in hindi on चुनाव (निर्वाचन) Election पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

                         
चुनाव इन दिनों विशेष मायने रखता है ,किसी भी लोकतांत्रिक देश में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि और सरकार का  देश पर शासन होता  है I प्रत्येक ऐसे नागरिक जो 18 वर्ष से ऊपर हो स्वतंत्रतापूर्वक अपनी इच्छानुसार वोट देने का अधिकार है, अर्थात दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि देश के न्यायपूर्ण संचालन का बागडोर देना जनता पर निर्भर करती हैI  इसलिए सरकार जनता के प्रति जवाबदेह हैI  देश में चुनाव की परंपरा प्राचीन समय से ही चला आ रहा है ,जब राजशाही शासन व्यवस्था था तब भी सम्राट, राजाओं व मंत्रियों द्वारा अपना उत्तराधिकारी का चुनाव करते थे, जिसमें जनता की कोई भागीदारी नहीं होती थीI  राष्ट्रीय रूप से  भारत में सर्वप्रथम चुनाव सफलतापूर्वक लॉर्ड  लिनलिथगो  के कार्यकाल में  हुआ थाI स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश की प्रथम पहचान स्वतंत्र रूप से वोट अर्थात मत देने का अधिकार है ,भारत एक ऐसा देश है जहां जनता को शासन संबंधी कार्य में भाग लेने का अधिकार दिया गया हैI देश में निष्पक्ष रुप से चुनाव( निर्वाचन) और जनता के हाथ में मौलिक अधिकार के साथ -साथ मूलभूत सुविधाएं प्रदान करना भारत के लोकतंत्रात्मक  राष्ट्र की पहचान हैI  भारतीय संविधान सभा का निर्माण कैबिनेट मिशन के संस्तुतियों के आधार पर किया गया था, मिशन योजना के तहत
ही प्रथम बार पूर्ण रूप से भारतीयों द्वारा चुनाव जुलाई 1946 में किया गया ,निर्वाचन को भारतीय संविधान में भाग 15 और अनुच्छेद 324 से 329 तक में रखा गया हैI इसके लिए निर्वाचन आयोग की व्यवस्था भी की गई है, जिनका मुख्य कार्य राजनीति दलों के लिए आचार संहिता तैयार करवाना, मतदाता सूचियों को तैयार कराना, विभिन्न राजनीतिक दलों को मान्यता प्राप्त देना ,चुनाव चिन्ह प्रदान करना,चुनाव क्षेत्रों का परिसीमन , शांति एवं स्वतंत्र रूप से मतदान करवाना हैI

  निर्वाचन आयोग  संवैधानिक संस्था है जिसके अंतर्गत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त की  राष्ट्रपति के द्वारा नियुक्ति होती हैI  निर्वाचन आयोग और सरकार द्वारा चुनाव में चुनावी प्रक्रिया के सुधार हेतु समय-समय पर इसमें संशोधन भी किया गया जैसे कि मतदाताओं का उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया जिससे युवाओं की भागीदारी देश निर्माण में और भी बढ़ गई, कागजी और बैलेट पेपर वाली प्रणाली को समाप्त कर इलेक्ट्रॉनिक मशीनों द्वारा(EVM) जिसे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन कहा जाता है, वोट देने की सुविधा प्रदान की गई, जिससे समय की बचत के साथ-साथ किसी भी प्रकार के गड़बड़ियों की संभावना काफी कम हो गई I चुनाव आयुक्त द्वारा सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि अपराधिक मामलों में लिप्त व्यक्ति चाहे सामाजिक रूप से हो या आर्थिक रूप से किसी भी चुनाव का प्रतिनिधित्व  नहीं कर सकते, इसके अलावा स्वतंत्र चुनाव के महत्व देखते हुए समय-समय पर चुनावी नियमावली को सुधार हेतु निर्वाचन आयुक्त द्वारा राष्ट्रपति को परामर्श दिया जाता है जिसे राष्ट्रपति समय-समय पर लागू भी करते हैंI  चुनाव  देश को सामाजिक एवं केवल आर्थिक रूप से ही नहीं बल्कि शिक्षित, धर्मनिरपेक्ष, विकासशील  शांति जैसी प्रक्रिया को लागू कर देश के  विकास  मे अहम भागीदारी निभाता हैI  इसीलिए मतदाताओं को  राजनीतिक प्रशिक्षण देकर  हमेशा जागरूक किया जाता है I

 चुनाव का प्रयोग व्यापक स्तर पर राष्ट्रीय, क्षेत्रीय ,कॉलेजों ,विश्वविद्यालयों, धार्मिक संस्थानों, खेल प्रशासकों  आदि में भी होते हैंI  चुनाव की प्रक्रिया हमारे देश में अलग -अलग है, देश के लिए लोकसभा एवं राज्य के लिए विधानसभा का चुनाव होता है,जिसमें अलग-अलग राज्यों द्वारा अपने क्षेत्रों से चुनाव जीतकर आया प्रतिनिधि लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं उन्हें सांसद कहा जाता है I  वहीं राज्य- स्तर के चुनाव में आने वाले प्रतिनिधि जो  की विधानसभा में प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें विधायक कहा जाता हैI  इसके अलावा नगरों  एवं गाँवों  में भी नगर निकाय पंचायतों का चुनाव होता हैI  भारत में वोट डालने को अर्थात मत देने के लिए किसी भी तरह की कानूनी बाध्यता नहीं है ,क्योंकि यह नागरिकों का मौलिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है कर्तव्य से नहीं, पर राष्ट्र के विकास में अहम भूमिका,न्यायपूर्ण शासन ,आर्थिक व शांति व्यवस्था  की अहमियत समझ कर हर नागरिकों को चुनाव में शामिल होकर अपने पसंदिदानुसार वोट जरूर करना चाहिएI  जिससे हम भी राष्ट्र के विकास में अपना वोट का  प्रयोग कर अहम भागीदारी निभा सकेI  यही एक अच्छे नागरिक का कर्तव्य एवं अधिकार भी है , मुख्य  चुनाव की अवधि  5 वर्ष रखी गई है परंतु देश में हर वर्ष कहीं न कहीं विधानसभा, लोकसभा चुनाव ,उपचुनाव होती रहती है जिससे आम जनता को परेशानी के साथ- साथ सरकारी  कामकाज का ठप होना, सरकारी राशियों का व्यय भी होता है  इससे बचने के लिए एक राष्ट्र एक चुनाव की मुद्दा भी उठने लगी है ,देश में अहिंसा धर्मनिरपेक्षता व अनुशासित बनाए रखने के लिए चुनाव की भागीदारी काफी अहम हैI  

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