Saturday, January 26, 2019

Essay in Hindi on गाय | Cow पे हिंदी में निबंध (लेख ) Nibandh lekh

                           
गाय एक पालतू जानवर है ,गाय को विश्व की अपेक्षा भारत मे जानवरों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता हैI  प्राचीन काल से ही भारत में गायों के प्रति अध्यात्मिक, व्यवसायिक रूप से काफी अहम माना गया हैI गाय का विशेषकर हिंदू धर्म में माता का रूप दिया गया है जो देवी- देवताओं के भाँती पूजनीय हैं, गाय के चार पैर,दो सींग एक लंबी पूछ है होती है I गाय के पैरों में  खुर होते हैं जो उनके दलदली व ऊँचे -नीचे  जैसे स्थानों में भी आसानी से चलने में मदद करता है ,गाय के बारे में आध्यात्मिक रूप से अगर बात किया जाए तो गाय का गोबर एवं मूत्र काफी पवित्र है जो कि हर सत्संग ,पूजा- पाठ के प्रारंभ में  गाय के गोबर से पुताई करना उस पूजा स्थल को शुद्ध माना गया है I गाय का मूत्र को गंगाजल की भांति ही पवित्र माना गया है ,गाय को गौ भी  कहा जाता है, गाय में ऐसा माना गया है कि सर्वाधिक देवी -देवताओं का वास हैI  गाय के दूध से मक्खन , दही, मिष्ठान आदि में प्रयोग की जाती  हैI सभी जानवरों जो घरेलू व मनुष्यों के दूध देने का कार्य करती हैं उनमें गाय सर्वश्रेष्ठ हैI 
गाय का दूध नवजात शिशु और बच्चों के लिए पौष्टिक व विटामिन  के समान माना गया है जो शरीर के हर रोगों से रक्षा करने का कार्य करता  हैI  गाय व्यवसायिक रूप से भी काफी अहम है, गाय का गोबर खेतों में खाद्य  के रूप में और उसे सुखाकर ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है जिससे किसानों से लेकर हर वर्ग के व्यवसाय के लिए काफी सहायक होता हैI  गायें भारत में घरेलू रूप से आजीविका का महत्वपूर्ण साधनों में से एक हैं I गाय कि कई प्रकार की नस्लें हैं भारत में लगभग तीस  प्रकार के गाय की नस्लें पाई जाती है जिसमें साहिवाल, रेड सिंधी, थारपारकर आदि  प्रमुख हैंI  गाय रंगों  में भी विभिन्न  प्रकार के होते हैं  हर गाय में दो रंगों  का मिश्रण अधिकतर होता है जिसके कारण  सुंदर व आकर्षक दिखने में लगती हैं I गाय शांत- स्वभाव की जानवर है, गाय का कद -काठी भी विभिन्न प्रकार के होते हैं I 

इनके मूत्र फोड़े- फुंसी आदि में चिकित्सा के रूप में भी उपयोग होता है पूरे विश्व में सर्वाधिक गायों की जनसंख्या भारत में है और दूसरे स्थान पर ब्राजील हैI  विदेशी गायों में जर्सी नस्ल की गाय काफी प्रसिद्ध  है, गाय को गोवर्धन पूजा के दिन विशेष रूप से पूजा की जाती है I  सनातन धर्म में गाय की सेवा करना किसी भगवान  के सेवा की भाँती  माना गया है I गाय का  घास ,पुआल ,चारा आदि उनका मुख्य भोजन है गाय का गर्भ  काल 12 महीने का होता है इसके उपरांत वह बच्चे को जन्म देती हैं जो बछड़ा या बाछी के  रूप में जन्म लेते हैंI  बछड़ा बड़े होकर बैल बनते हैं जो  खेती के काम के साथ -साथ गांव में  यातायात के रूप में उपयोग किया जाता हैI  बाछी  बड़ी होकर गाय का रूप ले लेती हैंI  गाय में भी विभिन्न प्रकार के दूध देने वाली होती हैं कोई गाय दो बार दूध करती हैं तो कोई गाय उनसे अधिक, जो गाय प्रचूर मात्रा में दूध देती हैं उन्हें सर्वांगी नस्ल का गाय कहा जाता है I 

विश्व में गायों की कुल संख्या करीब एक अरब से अधिक है, गाय का सारा जीवन मनुष्य  की सेवा के काम में लगता है अर्थात गाय जन्म से ही मनुष्य  के उपयोग में आती हैंI  मरने के बाद भी गायों की चमड़े  पर्स, ढोल आदि जैसे कई महत्वपूर्ण वस्तुओं का निर्माण में उपयोग होती है I गाय की हड्डी खाद्य - उर्वरक  बन कर हमारे खेतों में काम आते हैं इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गाय जीवन और मरण दोनों के बाद भी  मनुष्य के लिए काफी उपयोगी हैI  इसलिए मनुष्य का भी पहला कर्तव्य बनता है कि गाय को तन- मन से उनकी देखभाल करें ,उनकी स्वास्थ्य को हमेशा ख्याल रखें तथा समय पर भोजन देंI 

  गाय समृद्धि व वैभव का साधन के साथ -साथ धार्मिक व आर्थिक दोनों रूप से मानव को मजबूत बनाती है परंतु आज के दिनों में बढ़ती जनसंख्या ,गरीबी, बेरोजगारी के कारण लोग गाय को रखने में और उनकी देखभाल करने में असमर्थता जताते हैंI गायों  में प्रदूषण और विषैले खाद्य-पदार्थ खाने से गाय की मौतों की संख्या तेजी से बढ़ी है हाल ही के दिनों में सबसे ज्यादा गाय प्लास्टिक उनसे संबंधित खाद्य पदार्थों के कारण काल के गाल में समा गई हैं जो काफी चिंता का विषय हैI  शहरों  में प्राय: देखा जाता है कि बिना उपयोग वाली गाय जो दूध नहीं देती परंतु गोबर देती है फिर भी उसे आवारा की तरह छोड़ दिया जाता है जिससे उन्हें पर्याप्त मात्रा में भोजन की नसीब नहीं होती और वह गंभीर रोगों से ग्रस्त हो जाती  हैं हमारा कर्तव्य है कि जानवरों को भी मनुष्य की भांति उनकी देखभाल और उन पर हिंसा न करना, घर से थोड़े भोजन उनके लिए रखना यह रोजाना की जिंदगी में शामिल होI  इस प्रकार गाय हमारे जीवन में जानवर होते हुए भी सूख -समृद्धी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं I      

No comments:

Post a Comment